Hiroshima Day, history: हिरोशिमा-नागासाकी के धमाकों ने 1 लाख लोगों की ली थी जान, जानें 76 साल पुराना काला इतिहास

JBT Staff
JBT Staff August 6, 2021
Updated 2021/08/06 at 8:39 PM

Hiroshima Day, history: जापान के इतिहास के सबसे बुरे दिनों की बात करें तो 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा में परमाणु बम से हमला हुआ था जबकि 9 अगस्त 1945 को नागासाकी की सरजमीं पर इतना भयंकर विस्फोट हुआ था कि हवा में काला धुआं व राख के सिवा कुछ नहीं दिखा था.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका (America) ने जापान (Japan) को सबक सिखाने की ठानी तो मासूम व बेकसूर लोगों की परवाह भी नहीं की, वहीं हिरोशिमा (Hiroshima) में हमले के बाद भी जापान समर्पण को तैयार नहीं हुआ जिसका भयानक अंजाम उनके एक और शहर नागासाकी (Nagasaki) ने भी देखा.

न सिर्फ इन भयानक विस्फोटों (Hiroshima and Nagasaki Bombings) से बल्कि इनके धुंए व राख के प्रभाव से भी हजारों लोगों की जान चली गई थी, इनके प्रभाव को काली बारिश भी कहा जाता है जिससे लोगों की तबियत बिगड़ी, दम घुटने लगा था जिसके प्रभाव से 40 हजार लोग मरे थे हालांकि दोनों विस्फोटों की वजह से लाख से ज्यादा लोगों ने जान गवाई.

अमेरिका ने इस्तेमाल किया था पहला परमाणु हथियार

अमेरिका की वायु सेना ने 6 अगस्त 1945 की सुबह छह बजे हिरोशिमा के उपर लिटिल बॉय (Little Boy Bomb) नाम का परमाणु बम गिराया था, यह पहला परमाणु हत्यार (First Nuclear Weapon destroyed Hiroshima) था जो किसी युद्ध में इस्तेमाल किया गया. लिटिल बॉय का वजन 4000 किग्रा था जिसकी लम्बाई 10 फीट बताई जाती है, इसमें 65 किग्रा यूरेनियम भरी थी.

जापान के हिरोशिमा शहर को बुरी तरह तबाह करने के पीछे की वजह बताई जाती है कि अमेरिकी नौसैनिक बेस पर्ल हार्बर पर हुए साल 1941 में जापानी सेना द्वारा हमले का बदला था यह लिटिल बॉय बम. विस्फोटों से बुरी तरह नष्ट हुए घरों, इमारतों आदि का मलबा व राख, बम के निकले रेडियोएक्टिव पधार्थ के साथ वातावरण में मिलकर बादल के रूप में घातक बना, वायुमंडल के वाष्प के साथ यह धरती पर काले रंग की बारिश करने लगे, कहा जाता है इस काली बारिश से लोग निर्जलित हुए, खाल जलने और भी कई तकलीफें होने लगी थी.

नागासाकी में गिरा था फैट मैन

जिस तरह हिरोशिमा में गिराए परमाणु बम को लिटिल बॉय नाम दिया गया था उसी तरफ नागासाकी में और भी शक्तिशाली बम गिराया गया था जिसका नाम था फाइट मैन (Fat Man Bomb in Nagasaki), 4500 किग्रा वजनी यह बम 6.4 किग्रा प्लूटोनियम से भरा था, इसकी लम्बाई 11.5 फीट थी, जापान की सेना का हेडक्वार्टर यहीं था इसलिए यहां ज्यादा पावरफुल बम गिराया गया था.

विस्फोट से ही नहीं काली बारिश से भी मरे लोग (Hiroshima Black Rain)

1945 में हुए इन धमाकों के बाद जिंदा लोगों ने भी मौत की दुआएं की होंगी क्योंकि शहर का पीने-नहाने का पानी बुरी तरह दूषित हो गया था, कई लोगों की रौशनी चली गई तो कईयों को कैंसर हो गया था. कहा जाता है 6 अगस्त को हिरोशिमा के तीन दिन बाद 9 अगस्त को नागासाकी हमला किया गया, इसके बाद जापान के सम्राट हीरोहीतो ने दलील दी कि मित्र देश के पास कोई अमानवीय हथियार है, और सरेंडर कर दिया, जबकि अमेरिका तीसरे हमले की भी तैयारी कर चुका था.

फिर कभी इस्तेमाल नहीं हुए परमाणु हथियार

हिरोशिमा व नागासाकी में परमाणु हाथियारों का अंजाम देखकर फिर कभी किसी देश ने ऐसा सोचा भी नहीं, इस तरह की नीतियों को भी बढ़ावा मिला हालांकि इस तरह नरसंहार व जापान के 7वें सबसे बड़े शहर हिरोशिमा व सेना हेडक्वार्टर शहर नागासाकी को बर्बाद करने के लिए आज तक अमेरिका ने माफी नहीं मांगी है.

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