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उत्तराखंड पलायन आयोग रिपोर्ट: 46.9 लाख कामगारों में 1.6 लाख पर्यटन पर निर्भर

एस.एस. नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन आयोग

एस.एस. नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन आयोग

उत्तराखंड में इको-टूरिस्म की अपार संभावनाओं को नकारती सरकारें पलायन आयोग की रिपोर्ट से बेपर्दा हो गयी हैं. रिपोर्ट बताती है कि कैसे सरकार इको-टूरिस्म से युवाओं को रोजगार दे सकती है और कैसे सरकारी उदासीनता ने इस मौके को खो दिया.

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में पर्यटन आम लोगों के लिए रोजी रोटी का एक बड़ा जरिया है. पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 46.9 लाख कामगारों में 1.6 लाख लोग पर्यटन पर निर्भर हैं, जो कि कुल रोजगार का 17.10 हिस्सा है.

आयोग की रिपोर्ट बताती है कि उत्तराखंड में 374575 भारतीय पर्यटक साल 2017 में उत्तराखंड आये. इसी तरह 11685 विदेशी पर्यटकों ने उत्तराखंड की वादियों का आनंद लिया. कुल मिलाकर 386260 पर्यटक उत्तराखंड आये जिनसे 1168.07 लाख का राजस्व राज्य को मिला. खास बात ये है कि करीब 4 लाख पर्यटकों में 2.5 लाख पर्यटक अकेले कॉर्बेट नेशनल पार्क में आये. जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या भी पिछले साल की तुलना में घटी. साफ है कि राज्य सरकारों ने न तो नए इको-टूरिज़्म स्थल विकसित किये न ही कॉर्बेट को छोड़कर कहें दूसरी जगह फोकस किया. इन्ही बातों का उल्लेख करती पलायन आयोग की इको टूरिज्म पर आधारित रिपोर्ट मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को आयोग के उपाध्यक्ष एस एस नेगी ने सौंपी.

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उत्तराखंड में 6 राष्ट्रीय पार्क है और वाइल्ड लाइफ टूरिज़्म से लेकर राफ्टिंग, होम स्टे, हाईकिंग और माउंटरिंग तक पर्यटन के लिए कई सेक्टर…लेकिन कोई भी ऐसी जगह नही जहां सरकारों ने पर्यटन के लिए कुछ अलग या खास किया हो…पलायन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को नए क्षेत्रों को विकसित करने की सलाह दी है साथ ही मौजूदा डेस्टिनेशन पर भी काम करने की राय दी है.

उधर आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उनको इको टूरिज़्म से जुड़ी रिपोर्ट दी गयी है और इसमे अबतक इको टूरिज्म में क्या रहा इसकी जानकारी दी गयी है। जिसके आधार पर काम किया जाएगा.

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