Cricket

वर्ल्ड कप: 1987 की वो कहानी, जिसने तोड़ दिया था करोड़ों भारतीय क्रिकेट फैंस का दिल

ICC World Cup: भारतीय क्रिकेट टीम ने 1983 में पहली बार लॉर्ड्स के मैदान पर वर्ल्ड कप जीत कर इतिहास रचा था. 83 के वर्ल्ड कप ने भारत में इस खेल की एक अलग कहानी लिखी.

जिसके चलते ठीक 4 साल बाद ये कारवां 1987 में भारत पहुंचा. 1983 में चौथी बार विश्व कप का आयोजन हुआ. पहली बार यह टूर्नामेंट भारतीय उपमहाद्वीप में आया और भारत के साथ पाकिस्तान ने इसकी संयुक्तमेजबानी की. भारत में इस टूर्नामेंट को लेकर एक अलग ही क्रेज नजर आ रहा था.

उस समय भारत इस खिताब की मेजबानी तो कर ही रहा था लेकिन साथ ही इस टीम पर खिताब को बचाने की चुनौती भी थी. लेकिन शायद किस्मत को और ही कुछ मंजूर था.

यह भी पढ़ें:  विश्वकप 2019: चैक करें क्रिकेट वर्ल्ड कप का ताजा हाल, पॉइंट्स टेबल, नेट रन रेट etc.

भारतीय टीम सेमीफाइनल तक ही पहुंचा पाई थी और वह लगातार दूसरा खिताब जीतने से दूर हो गई. उस टूर्नामेंट की शुरुआत ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला ही मैच 2 रन से हार कर की थी. इसके बाद भारत न्यूज़ीलैंड के खिलाफ भी अपना दूसरा मुकाबला हार चुकी थी.

भारत के इस तरह के प्रदर्शन पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था. लेकिन ग्रुप स्टेज के तीसरे मुकाबले में भारत ने जिम्बावे को हरा कर फैंस के दिलों में एक बार फिर नई उम्मीद जगाई. तीसरे मैच में जिंबाब्वे को 135 रन पर समेटने के बाद भारत ने आसानी से दो विकेट खोकर मैच आठ विकेट से जीत लिया.

यह भी पढ़ें:  वर्ल्ड कप 2019: क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक फाइनल में जीता इंग्लैंड, खिताब के हकदार थे कीवी लेकिन

किसी तरह भारतीय टीम हार और जीत के सिलसिले के बीच दूसरे सेमीफाइनल तक पहुंची लेकिन उसका मुकाबला इंग्लैंड से हुआ. दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 254 रन बनाए.

255 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के बल्लेबाज टिक कर नहीं खेल सके और टीम 45.3 ओवरों में 219 रन ही बना पाई और इंग्लैंड ने मैच को 35 रनों से अपने नाम किया.

इस हार के साथ ही भारतीय टीम के साथ करोड़ों भारतीय खेल प्रेमियों का सपना भी टूट गया और भारत अपने ही घर में ख़िताब को बचा नहीं सका.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



To Top