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Ravi Kumar Dahiya Biography in Hindi: मेडलिस्ट रवि दहिया के पिता राकेश दहिया ने भी झोंकी थी जान

Photo: Starsunfolded

Ravi Kumar Dahiya Biography in Hindi, Tokyo Olympics 2020: भारतीय पहलवान रवि दहिया ने जिस खेल भावना व संयम का परिचय टोक्यो ओलिंपिक में दिया है उससे पूरे देश का सर ऊंचा हुआ है, हालांकि 23 वर्षीय पहलवान रवि फाइनल में हार गए लेकिन इतिहास रच दिया.

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है जहां सेमीफाइनल मैच में रवि का विरोधी उनके बाजू पर जोर से दांत लगा देता है लेकिन रवि दहिया अपने दांव को ढीला नहीं करते हैं. फाइनल मुकाबले में वह रशिया के 26 वर्षीय पहलवान उगुएव से हार गए, इस तरह भारत को यहां सिल्वर मेडल से संतुष्ट रहना पड़ा.

सेमीफाइनल मुकाबले में एक तरफ जहां कजाकिस्तान (Kazakhstan) के खिलाड़ी की शर्मनाक हरकत कैमरे में कैद हो गई और अब पूरी दुनिया कोस रही है तो दूसरी तरफ भारतीय पहलवान रवि दहिया (Ravi Dahiya) के खेल की हर जगह तारीफ हो रही है, उन्होंने फाइनल मुकाबले में भी सीनियर खिलाड़ी को टक्कर दी थी.

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इससे पहले रोमांचक मुकाबले में नूरइस्लाम सनायेव (Nurislam Sanayev) नाम के प्लेयर ने हार को करीब देखकर रवि के बाजू पर जोर का दांत लगा डाला, वीडियो में साफ इस बात को देखा जा सकता है. 57 किग्रा के वेट केटेगरी में खेलते हुए इस युवा पहलवान ने नूरइस्लाम को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी.

खेल के दौरान एक समय पर 2-9 से पीछे रहे रवि दहिया ने दमदार वापसी की, आखिरी मिनट तक जिस जज्बे के साथ वह खेले कजाकस्थान का रेसलर पूरी तरह परास्त होता नजर आया था. रवि ने लंदन ओलिंपिक 2012 के फाइनल में पहुंचे सुशील कुमार की बराबरी कर ली, सुशील इन दिनों सागर धनखड़ हत्याकांड मामले में दिल्ली के तिहाड़ जेल में हैं.

सोनीपत के नाहरी से टोक्यो तक का सफर नहीं था आसान (Ravi Kumar Dahiya Biography in Hindi)

किसान परिवार में जन्मे रवि दहिया (Wrestler Ravi Dahiya) का जन्म 12 दिसंबर 1997 में हुआ था, पिता राकेश दहिया (Rakesh Dahiya) के पास मात्र 4 बीघे खेती की जमीन है जबकि 20 एकड़ जमीन पट्टे पर लेकर खेती किया करते हैं.

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राकेश दहिया (Ravi Dahiya father name) भले ही खेतों में पसीना बहाते हैं लेकिन किसी जमाने में उन्हें पहलवानी का बड़ा शौक था और सपना देखा था कि देश के लिए मेडल लायेंगे. गरीबी ने रोड़े डाले तो वह हिम्मत हार गए और खेती बाड़ी करने लगे, रवि दहिया के जन्म के बाद उन्होंने बेटे को पहलवानी के लिए प्रेरित किया, जितनी मेहनत उन्होंने बेटे रवि दहिया से करवाई उससे ज्यादा राकेश दहिया ने खुद की है, उसी का नतीजा है कि बेटे ने आज सिल्वर मेडल दिलाया है.

रोजाना 70 किलोमीटर सफर करते थे रवि दहिया के पिता राकेश दहिया

किसानी व पशुपालन के जरिए परिवार की देखरेख करने वाले राकेश दहिया की मेहनत आज रंग लायी है, उनके बारे में बताया जा रहा है कि वह रोजाना नाहरी से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम बेटे को दूध व मक्खन पहुंचाने जाया करते थे. एक पहलवान की डाइट कैसी होती है, इसका अंदाजा तो सभी को है और फिर राकेश दहिया को तो पहलवानी का खुद भी शौक रहा था.

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राकेश दहिया सुबह साढ़े बजे उठकर बेटे के लिए दूध मक्खन पैक किया करते थे और फिर लगभग 5 किलोमीटर पैदल रेलवे स्टेशन पहुंचा करते थे, आजादपुर स्टेशन उतरकर फिर 2 किलोमीटर का रास्ता पैदल चलकर छत्रसाल पहुंचा करते थे.

रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) के बारे संक्षेप में

रवि कुमार दहिया– फ्रीस्टाइल रेसलर

DOB– 12 दिसंबर 1997

हाइट– 5 फीट 7 इंच

वेट– 57 किग्रा

ब्रांज मेडल– वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2019

सिल्वर मैडल– टोक्यो ओलिंपिक 2020

देशभर में रवि कुमार दहिया के खेल से सभी खुश हैं:

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