Cricket

जीत का जज्बा, टेक्नीक और धैर्य से भरपूर थे गंभीर, मैदान पर कभी नहीं मानते थे हार

क्रिकेट के मैदान पर जज़्बा हर खिलाड़ी के अंदर भरा होता है लेकिन कभी हार ना मानने और हमेशा जीत की भूख वाला गौतम गंभीर का जज़्बा और फिल्ड पर उनका रवैया उन्हें बाकी क्रिकेटर्स से अलग बनाता है. पिछले 15 सालों में गौतम ने खुद को विश्व के दिग्गज सलामी बल्लेबाजों में शामिल किया.

क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले गंभीर कई यादगार पल छोड़ गए. उनकी करियर के ये पल क्रिकेटप्रेमियों को हमेशा याद रहेंगे. गंभीर के मन में संन्यास की बात तभी आ गई थी, जब पिछले आईपीएल में उन्हें मजबूरन टीम की कप्तानी छोड़नी पड़ी थी.

काफी समय से खराब फॉर्म से झूझ रहे गंभीर ने आखिरकार संन्यास ले लिया है. उनके इस फैसले के बाद सभी उन्हें वर्ल्ड कप का हीरो कहते हुए उनकी तारीफ़ कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें:  India Vs NZ 2019 Second T20 Playing 11: दूसरे टी-20 में इन 11 खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतर सकती है टीम इंडिया

इस फैसले के बाद गंभीर को लोगों का सपोर्ट मिल रहा है. गंभीर का अपना एक स्टाइल था, एक जज्बा था, जो उन्हें बाकी क्रिकेटर्स से अलग बनाता है. आइये आपको गंभीर के बारे में कुछ बड़ी बातें बताते हैं.

खेलने का तरीका

गंभीर का खेलने का तरीका हमेशा से ही अलग रहा. जब गंभीर ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा तो सभी ने यही कहा था कि उनकी टेक्नीक उन्हें ज्यादा आगे नहीं जाने देगी. लेकिन गंभीर ने अपनी बल्लेबाज़ी से 10 सालों तक क्रिकेट के मैदान पर राज किया. अपनी सीमित प्रतिभा के बावजूद वह सहवाग का अविश्वसनीय सलामी जोड़ीदार रहे. उन्होंने 2009 में आईसीसी सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज का खिताब अपने नाम किया.

यह भी पढ़ें:  दूसरे टी-20 में रोहित ने तोड़े 3 बड़े रिकॉर्ड, पूरा विश्व कर रहा है हिटमैन को सलाम

धैर्य

धैर्य के दम पर गंभीर शीर्ष स्तर पर बने रहे. अपने इसी गुण को गंभीर ने हमेशा अपने करियर में अपनाए रखा और भारत के लिए कई यादगार पारियां भी खेली. गंभीर इकलौते बल्लेबाज थे, जो मौके ढूंढते नहीं थे बल्कि उनके धैर्य की वजह से मौके खुद उनके पास चल कर आते थे.

गंभीर का धैर्य उनकी कई टेस्ट पारियों में देखने को मिलता है. न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ 2009 में नेपिएर में तीसरे टेस्ट में गंभीर ने अपने धैर्य का परिचय दिया था.

न्यूज़ीलैण्ड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 619 रन बनाए. जवाब में भारतीय टीम 305 रन पर आल आउट हो गई. फॉलो ओन खेलने उतरी भारतीय टीम पर हार का खतरा मंडरा रहा था. गंभीर ने भारत की दूसरी पारी में 436 गेंदें खेलते हुए 136 रन बनाए. इस मैराथन पारी में गंभीर 10 घंटे से ज्यादा ताज विकेट पर टिके रहे. गंभीर की इस पारी की वजह से भारत ने मैच ड्रा करा दिया.

यह भी पढ़ें:  India Vs NZ 2019: न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी-20 मैच में ये हैं टीम इंडिया की हार के 3 बड़े कारण

कभी हार ना मानने का जज्बा

मैदान पर हर खिलाड़ी जीत के इरादे से उतरता है लेकिन ऐसे कुछ ही खिलाड़ी होते है, जिनके अंदर जीत का जज्बा मैच के आखिरी तक बना रहता है. गंभीर उनमें से एक नाम थे.

हर फॉर्मट में गंभीर को आज भी कोहली से ज्यादा आक्रामक और जीत के जज्बे वाला खिलाड़ी माना जाता है. भले ही पूरी टीम एक मैच को हारा हुआ समझ लेती हो लेकिन गंभीर ने कभी अंत तक हार नहीं मानी. वर्ल्ड कप 2011 का फाइनल इसका उदहारण है.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


To Top