Mirabai Chanu: देश को मैडल दिलाने वाली मीराबाई चानू की कहानी प्रेरणादायक, लकड़ी बीनने शुरू हुआ था सफर

JBT Staff
JBT Staff July 24, 2021
Updated 2021/07/24 at 3:44 PM

Tokyo Olympic: टोक्यो ओलिंपिक 2020 में देश के नाम पहला मेडल हो चुका है, खुशी का माहौल है. राजनेताओं व स्पोर्ट्स पर्सनालिटीज से लेकर एक्टर्स ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की है. 26 वर्षीय मीराबाई के घर की तस्वीरें व वीडियो वायरल हो रही हैं जहां गांव के लोग साथ बैठकर लाइव देख रहे हैं.

पूर्व भारतीय विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (Virendra Sehwag) अपने चित परिचित अंदाज में पोस्ट लिखते हैं ‘भारतीय नारी सब पर भारी’, इसी तरह सचिन तेंदुलकर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर मीराबाई को बधाई दी है और मेडल की खुशी व्यक्त की है, पहला दिन और पहला मेडल.

8 अगस्त 1994 की जन्मी मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने आज देश का नाम ऊंचा किया है, इसके पीछे की कहानी और भी प्रेरणादायक है. मणिपुर के नोंगपेक काकचिंग गांव की मीराबाई बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं, बचपन में वह तीरंदाज बनना चाहती थी लेकिन आठवीं कक्षा की किताब में एक ऐसा चैप्टर पढ़ा जिसने उनका इंटरेस्ट बदल डाला.

गरीब परिवार की वजह से बचपन से ही संघर्ष शुरू हो गया था, वह पहाड़ों से जलावन की लकड़ियों का बोझ उठाकर लाया करती थी और मजबूती इसी से शारीर में आ चुकी थी, बचपन से ही भारी से भरी वजन उठाने की आदत डल चुकी थी.

आर्चर बनने की चाह जरुर थी लेकिन मशहूर वेटलिफ्टर कुंजरानी देवी के बारे में पढ़कर अपना लक्ष्य बदल डाला, भारतीय वेटलिफ्टर कुंजरानी के नाम इस गेम में सबसे ज्यादा मेडल हैं, प्रभावती होकर मीराबाई ने अपना लक्ष्य तय कर दिया और वजन उठाने में तो वह एक्सपर्ट ही हो गई. इस साल के लिए वेटलिफ्टिंग में वह एकमात्र भारतीय हैं.

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में 48 किलो वेट केटेगरी में सिल्वर लाकर हौंसला बढ़ा और फिर पीछे नहीं देखा. शानदार प्रदर्शन के चलते रियो ओलिंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया था लेकिन खास प्रदर्शन नहीं किया था. विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप 2017 में वापसी की थी, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था.

Share this Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.