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West Bengal: कैसे नंदीग्राम से हारी हुई ममता बनर्जी बनेंगी सीएम, कोर्ट का खटखटाएंगी दरवाजा

West Bengal: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल विधानसभा चुनाव में फतेह हांसिल कर ली लेकिन इस विशाल जीत का मजा तब किरकिरा हो गया जब पता चला कि नंदीग्राम विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी चुनाव हार गई.

सालों बाद भारतीय जनता पार्टी को बंगाल में बड़ी जीत की उम्मीद थी, पार्टी के सभी शीर्ष नेताओं ने जद्दोजहद की, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक ने कोरोना को दरकिनार कर रैलियां की, बॉलीवुड के मशहूर एक्टर मिथुन चक्रवर्ती को स्टार प्रचारक की भूमिका सौंपी गई लेकिन यह सब काम नहीं आया.

तीसरी बार तृणमूल कांग्रेस को बंगाल की जनता ने प्रदेश की कमान सौंपी, प्रचंड बहुमत से सरकार तो बनी लेकिन ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) नंदीग्राम विधानसभा सीट से 1957 से चुनावी मैदान में परास्त हो गई, बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हांसिल कर बीजेपी की झोली में आंशिक खुशी डाली.

सुवेंदु अधिकारी की जीत के बाद ममता बनर्जी ने सवाल उठाए हैं, उनका कहना है अंत में कुछ हेरफेर की गई है क्योंकि वह पहले नंदीग्राम से जीती हुई प्रत्याशी घोषित की गई थी, उन्होंने दावा किया इस मामले में न्यायालय जायेंगी. अब सवाल उठता है हारी हुई प्रत्याशी व तृणमूल की मुखिया आखिर कैसे सीएम की कुर्सी संभालेंगी.

विधायक न रहते हुए भी सीएम बनने का प्रावधान है, इससे पहले बिहार के लालूप्रसाद यादव, राबड़ी देवी, नीतीश कुमार, महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे, मध्यप्रदेश से कमलनाथ, उत्तर प्रदेश से योगी आदित्यनाथ व उत्तराखंड से हाल ही में तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री ने कमान संभाली.

वहीं बिना MLC व MLA रहे सीएम की कमान संभाली तो जाती है लेकिन शपथ लेने के बाद 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद में सदस्यता हांसिल करनी होती है, वर्ना मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ता है.

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