जम्मू-कश्मीर: अनुच्छेद 370 व 35ए के हटने से जश्न का माहौल, इतिहास पर डालें पर एक नजर

Umesh
Umesh August 5, 2019
Updated 2019/08/05 at 4:27 PM
Article 35A

Jammu-kshmir: मोदी सरकार, अध्यादेश लाकर जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल 35A को निष्प्रभावी करने में सफल हुई तो देशभर में जश्न का माहौल बनने लग गया है. आइये जानते हैं कि आखिर अनुच्छेद 35ए क्या है? 

लोकसभा चुनवा 2019 में 35ए जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर वोट मांग रही बीजेपी को विपक्ष ने चैलेंज किया, बहुत से दिग्गज नेताओं ने कहा था कि जम्मू कश्मीर से विशेष अधिकार वाला राज्य का दर्जा छीन के दिखाओ तो मानेंगे.

पिछले कुछ दिनों से यह मुद्दा गर्म था, अलगाववादी नेताओं ने हर संभव कोशिश की. कुछ घर में नजरबंद हुए, कुछ गिरफ्तार हुए लेकिन आज की ऐतिहासिक तारीख से छेड़छाड़ नहीं कर पाए. इस बीच घाटी में तनाव के माहौल बने रहे, मोबाइल इन्टरनेट की सेवाएं बंद कर दी गयी.

आइए नजर डालते हैं 35ए के इतिहास पर:

पहले समझ ले इतिहास

सन 1952 में जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला और भारत के प्रधानमंत्री नेहरु के बीच “दिल्ली एग्रीमेंट” साइन किया गया था.

इस एग्रीमेंट में भारत की नागरिकता को जम्मू और कश्मीर के निवासियों के लिए भी खोल दिया गया था. इसका मतलब ये हुआ कि जम्मू और कश्मीर के नागरिकों को भारत की नागरिकता मिल गई. सन 1952 के दिल्ली अग्रीमेंट के बाद ही 1954 में ‘अनुच्छेद 35A’ बनाया गया था.

जम्मू-कश्मीर का संविधान 1956 में बनाया गया था. इस संविधान के मुताबिक जम्मू-कश्मीर का स्थायी नागरिक उसे ही माना जाएगा जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो. साथ ही उस नागरिक ने जम्मू-कश्मीर में संपत्ति हासिल की हो.

कहाँ से आया अनुच्छेद 35ए (Article 35A)

14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35A जोड़ दिया गया.

अनुच्छेद 35A धारा 370 का हिस्सा है. इस धारा के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता इसके साथ ही वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता.

इसके अलावा भारत के किसी अन्य राज्य का नागरिक जम्मू & कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं बन सकता और ना ही वहां वोट डाल सकता है. अगर जम्मू & कश्मीर की कोई लड़की किसी दूसरे राज्य के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं.

आखिर क्यों हो रही थी इसे हटाने की मांग

1. इसे हटाने की मांग इसलिए बढ़ी क्योंकि ये धारा असवैंधानिक है. इसे हटाने के लिए पहली दलील यह है कि इसे संसद के जरिए लागू नहीं करवाया गया था. इसे राष्ट्रपति ने पारित किया था.

2. देश के विभाजन के वक़्त लाखों की तादाद में पाकिस्तान से शरणार्थी भारत आए. इनमें लाखों लोग जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं और उन्हें वहां की नागरिकता दे गई. वहीँ लाखों हिन्दू शरणार्थी ऐसे भी हैं, जिन्हें  जम्मू-कश्मीर की स्थाई नागरिकता नहीं मिल पा रही थी.

3. जम्मू & कश्मीर में विवाह कर बसने वाली महिलाओं के साथ राज्य सरकार का रवैया सही नहीं था. जम्मू & कश्मीर सरकार अनुच्छेद 35A की आड़ में ऐसी महिलाओं से भेदभाव करती आई है.

4. सबसे बड़ी बात ये है कि इस अनुच्छेद के कारण जम्मू & कश्मीर, भारत का होकर भी भारत का हिस्सा नहीं है. अनुच्छेद 35A और अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर को कई विशेष अधिकार मिले हुए हैं. उसका अपना अलग संविधान है, नागरिकता है और अपना राष्ट्रीय झंडा है.

भारत का राज्य होकर भी भारत के नागरिक इस राज्य को अपना नहीं समझ सकते. यह अनुच्छेद भारत के नागरिकों के साथ भेदभाव करता है क्योंकि इसके भारत के लोगों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी नहीं बन सकते.

ये बात सभी को मालूम है कि ये अनुच्छेद भेदभावपूर्ण है लेकिन तब भी पिछले 65 सालों से इसपर कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी. 2014 में एक NGO वी द पीपुल ने सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल (PIL) डालते हुए अनुच्छेद 35ए की वैधता पर सवाल उठाया था.

इसके अलावा इससे जुडी 20 याचिकाएं न्यायलय में लंबित हैं. करीब 14 बार यह मामला लिस्ट हो चुका है या कभी इसपर सुनवाई ही नहीं हुई.

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