शहीद दिवस 2021: आज ही के दिन 90 साल पहले भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को हुई थी फांसी

JBT Staff
JBT Staff March 23, 2021
Updated 2021/03/23 at 10:37 AM

Shaheed Diwas 2021: 90 साल पहले आज ही के दिन 23 मार्च 1931 को क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी. उन्हीं की शहादत को याद करते हुए आज का दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है.

अगर आज हम आजाद हैं तो ये लाखों लोगों के बलिदान का नतीजा है. जब भी भारत की आजादी की बात होती है, तब इन तीनों का नाम जरूर याद किया जाता है.

देश की आजादी के लिए खुशी-खुशी फांसी पर लटकने वाले तीन क्रांतिकारी वीरों को याद करके आज भी हर युवा के सीने में देशभक्ति की ज्वाला जाग जाती है.

भारत की आजादी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह (Bhagat Singh) और उनके साथी राजगुरु (Rajguru) और सुखदेव (Sukhdev) को आज ही के दिन 90 साल पहले 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी.

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी को देश की आजादी की सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है. इन वीरों द्वारा दिए गए बलिदान की याद में शहीद दिवस (Martyrs Day) मनाया जाता है.

भगत सिंह ने अपने क्रांतिकारी साथी राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज अधिकारी जे. पी. सांडर्स (J. P. Saunders) की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

जे. पी. सांडर्स की हत्या के जुर्म में तीनों को फांसी की सजा सुनाई थी. तीनों को 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल के भीतर फांसी दे दी गई थी.

बताया जाता है कि फांसी की तारीख 24 मार्च थी, लेकिन 1 दिन पहले ही फांसी दे गई थी. 23 मार्च 1931 को शाम करीब 7 बजकर 33 मिनट पर भगत सिंह और उनके दोनों साथी सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई थी.

दरअसल तीनों क्रांतिकारियों को फांसी देने का ऐलान पहले ही किया जा चुका था और यह खबर आग की तरह पूरे देश में फैल गई थी.

जनता के गुस्से और आक्रोश को देखते हुए अंग्रेजी सरकार के हाथ-पांव फूल गए और तीनों की फांसी का दिन और समय बदल दिया गया.

ऐसा कहा जाता है कि फांसी पर जाते समय भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव मस्ती से ‘मेरा रंग दे बसंती चोला, मेरा रंग दे बसंती चोला. माय रंग दे बसंती चोला’ गाना गा रहे थे.

फांसी पर चढ़ने से पहले जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से उनकी आखिरी इच्छा पूछी गई तो तीनों ने एक सुर में एक दूसरे से गले मिलने की बात कही, ऐसे वीर सपूतों को कोटि कोटि नमन.

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