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Shabnam Hanging Case: टल सकती है शबनम की फांसी, 7 अपनों को ही उतार दिया था मौत के घाट

Shabnam Hanging Case: अपने ही पूरे परिवार को मौत की नींद सुलाने वाली अमरोहा की शबनम के बारे में आम लोग अगर सोचें तो रूह कांप उठती है लेकिन उसके फांसी को लेकर भी कुछ लोगों की तरह-तरह की दलीलें हैं, इलाहाबाद हाईकोर्ट की वकील सहर नकवी को राज्यपाल को लैटर तक लिखी चुकी है.

वकील सहर नकवी (Saher Naqvi) के पत्र पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संज्ञान लिया है, अब देखना होगा क्या नतीजा निकलकर सामने आता है. आपको बता इसी साल फरवरी माह में आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी का ऐलान किया गया लेकिन यह कई कारणों से टलती रही और अब तो उम्मीद है शायद यह उम्रकैद बनकर ही रह जाएगी.

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गांव के कम पढ़े लिखे लड़के सलीम के प्यार में पागल शबनम ने साल 2008 में वो बर्बरता पेश की जिसे किसी भी समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता है, जेल में उसने सलीम के बच्चे को जन्म दिया, बेटे की परवरिश शबनम के किसी कॉलेज फ्रेंड की है, बेटे की तरफ से यह परिवार भी राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से गुहार लगा चुके हैं कि शबनम की फांसी टाली जाए.

वहीं वकील साहिबा सहर नकवी ने भी गुजारिश की है कि शबनम (Shabnam) की सजा को बरकरार अर्थात उम्रकैद की सजा को तो जारी रखा जाए लेकिन फांसी पर न चढ़ाया जाए. सहर नकवी, राज्यपाल को लिखे लैटर में कई बातें लिखती हैं, उनका कहना है शबनम की किए की सजा उसके बेटे को न मिले, वह अपनी मां से मिलता रहता है, ताज का जन्म जेल में ही हुआ था.

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आगे लिखती हैं आजाद भारत में किसी महिला को फांसी नहीं हुई है, इस देश में महिलाओं को पूजा जाता है, इससे गलत संदेश जाएगा और पूरी दुनिया में देश की छवि खराब होगी. राज्यपाल ने कारागार विभाग को इस केस में फैसला लेने का निर्देश दे दिया है, इसके लिए सहर नकवी ने धन्यवाद कहा है.

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