Rakesh Tikait: 28 साल पहले दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़ राकेश टिकैत ने शुरू की थी किसानों के लिए लड़ाई

JBT Staff
JBT Staff January 30, 2021
Updated 2021/01/30 at 3:41 PM

Rakesh Tikait: बीकेयू प्रमुख राकेश टिकैत के आंखों में किसान आंसू नहीं देख पाए, उनकी भावुक विडियो वायरल होने के बाद समर्थकों ने फिर एक बार किसान आंदोलन को मजबूत बनाने की ठान ली है.

26 जनवरी को हुए हिंसा के बाद कुछ किसानों ने अपना मन बदल दिया था लेकिन राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का भावुक अवतार उन्हें दोबारा खींचने में कामयाब रहा. इस परिवार का किसानों के साथ ऐतिहासिक साथ ही है जो किसानों को फिर एक बार खींच लाया है, उनके पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों के लिए लम्बी लड़ाई थी.

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के गांव में 4 जून 1969 को जन्मे राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश के मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए व एलएलबी की, साल 1992 में दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल उनकी तैनाती हुई लेकिन अगले ही साल उन्होंने दिल्ली पुलिस को इस्तीफा दे दिया क्योंकि उन्होंने किसानों की लड़ाई को अपनी जिम्मेदारी समझा.

पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में दिल्ली में 1993-94 किसान आंदोलन चल रहा था तभी राकेश टिकैत ने इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक वह किसानों के लिए लड़ाई के दौरान 44 बार जेल की हवा खा चुके हैं, इसमें एमपी में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ प्रोटेस्ट, गन्ने समर्थन मूल्य बढ़ाने, बाजरे समर्थन मूल्य बढ़ाने के मामले शामिल हैं.

किसान नेता के तौर पर उन्हें जाना जाने लगा लेकिन चुनावों में उन्हें कभी सफलता नहीं मिली, साल 2007 में पहली बार मुजफ्फरनगर के खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय लड़े थे जबकि 2014 में राष्ट्रीय लोक दल पार्टी से अमरोहा लोकसभा से चुनाव हारे.

पिछले साल नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़कों पर उतरे और राकेश टिकैत इसका चेहरा बने, उनकी बात को किसान शुरुवात से फ़ॉलो कर रहे हैं. गणतंत्र दिवस के बाद जैसे ही यह आंदोलन कमजोर पड़ने लगा तो उनके आंखों में आंसुओं ने फिर एक बार रुख बदल डाला.

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