Narsinghanand: जानिए दीपक त्यागी से यति नरसिंहानंद बनने की कहानी, रूस में पढ़ाई और लंदन में जॉब

JBT Staff
JBT Staff May 17, 2021
Updated 2021/05/17 at 5:26 PM

Narsinghanand: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया द्वारा यति नरसिंहानंद सरस्वती को मंच दिया गया तो सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ व समर्थन में ट्रेंड शुरू हो गए, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को जिहादी बताने से लेकर वह कई कट्टरपंथी वाले बयान दे चुके हैं.

यति नरसिंहानंद सरस्वती (Yati Narsinghanand Saraswati), हाल ही में डासना देवी मंदिर विवाद के बाद सुर्खियों में आए हैं, यहां एक 14 वर्षीय मुस्लिम लड़के की जमकर पिटाई हो गई थी. मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने इसे बिलकुल सही ठहराया था क्योंकि उनका कहना है अन्य धर्मों के लोग आकर यहां सनातन धर्म को ठेस पहुंचाते हैं, कई बार मंदिर में चोरी हो चुकी है, शिवलिंग पर पेशाब तक का मामला आ चुका है.

साथ ही उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि इन सभी कारणों की वजह से मंदिर के बाहर बोर्ड लगा है कि ‘गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है’, वहीं मीडिया ने जब सवाल किया कि पिटने वाला आसिफ तो पढ़ा लिखा था ही नहीं, इसपर उनका पारा चढ़ा और बोले 14 की उम्र में उसे पढ़ना नहीं आता, इनका सिर्फ नफरत फैलाने का काम है.

वह लगातार सनातन धर्म का प्रचार करते देखे जाते हैं, बता दें 53 वर्षीय महंत की कहानी इस मंदिर से शुरू नहीं होती है. वह विदेशों में न सिर्फ उच्च शिक्षा ले चुके हैं बल्कि बड़ी कंपनीयों में जॉब तक कर चुके हैं. वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उनकी छवि एक धर्मयोद्धा के रुप में है, वह अखिल भारतीय संत परिषद के अध्यक्ष हैं, क्षेत्र में दूर-दूर तक उन्हें लोग धर्मगुरु के रूप में मानते हैं.

नरसिंहानंद सरस्वती ने मॉस्को इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल मशीन बिल्डिंग से मास्टर्स डिग्री हांसिल करने के बाद बतौर इंजिनियर व मार्केटिंग क्षेत्र में जॉब की, लंदन में भी उन्होंने जॉब की है. समाचार 24×7 में प्रकाशित उनके द्वारा लेख में खुलासा हुआ आखिर वह कैसे दीपक त्यागी से संत बने, जिसके बाद वह दुनिया से इस्लाम को खत्म करने की बात कहते हैं. 1997 में जब वह वापस अपने मुल्क लौटे तो उन्होंने ठानी थी कि कुछ बड़ा करना है.

समाज में बदलाव के लिए वह राजनीति में आना चाहते थे, दादाजी आजादी से पहले बुलंदशहर जिले के कांग्रेस पदाधिकारी थे, पिता भी यूनियन लीडर थे. राजनीति में खासा दिलचस्पी के चलते वह समाजवादी पार्टी के यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष बन गए, तब तक उन्हें धर्म से कुछ लगाव नहीं था.

मेरठ के दीपक त्यागी का समाज में उठना बैठना बराबर होने लगा तो एक दिन उनकी मुलाकात भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक सांसद बैकुंठ लाल शर्मा से हुई, उन्होंने विशेष समुदाय की नफरत की कई कहानी व उदाहरण बताए जिसके बाद उनका दिमाग चकरा गया, उनके कई मुस्लिम दोस्त रहे थे और उन्हें कहानियों पर विश्वास नहीं हुआ.

एक दिन जब कोई हिंदू लड़की उनसे मदद के लिए आई तो नरसिंहानंद के भी आंसू निकल पड़े, उनका कहना है कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की ने आपबीती बताई कि क्लास में उसकी एक मुस्लिम फ्रेंड है, उसने अपने किसी जानने वाले मुस्लिम लड़के से दोस्ती कराई, एक दिन दोनों की अकेले में मुलाकात होती है, इस मीटिंग की फोटोग्राफ्स क्लिक कर दिए जाते हैं फिर इन फोटोग्राफ्स के जरिए जिस हद तक ब्लैकमेल किया गया कि युवती का रोना रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

उनका कहना है युवती को मुस्लिम स्टूडेंट्स से लेकर कई नेताओं के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया, वहीं इससे बाहर  जीवन सामान्य था क्योंकि उस समुदाय के लड़के-लड़कियां आपस में मिले थे और और इस तरह रहते थे जैसे कुछ हुआ ही नहीं, वह कहते हैं जिहाद शब्द ही उन्होंने उस लड़की से सुना.

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