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Shabnam: हिंदू संत ने की शबनम की फांसी रोकने की मांग, कारण बताया बहुत ही भयानक

Shabnam: आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी चढ़ाने की तैयारी जोरों पर है, पवन जल्लाद भी अपनी रोजी रोटी के लिए इस केस में आने वाले अहम दिन का इंतजार कर रहा है, वह दो बार मथुरा जेल का निरिक्षण भी कर चुका है.

अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए महिला फांसी घर में पहले कभी किसी को फांसी नहीं हुई है, ऐसे में जगह का निरीक्षण बड़ी इत्मीनान से किया जा रहा है. दूसरी तरफ शबनम की फांसी रुकवाने के लिए एक हिन्दू धर्म गुरु ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपील की है.

अयोध्या के महंत परमहंस दास (Paramhans Das) का कहना है सनातन धर्म में महिला का स्थान पुरुष से कई ऊपर माना जाता है, एक महिला को फांसी के फंदे पर लटकाना मतलब किसी बड़ी अनहोनी को न्योता देना जैसा है या कहें इस मृत्युदंड से किसी का भला नहीं होगा उल्टा दुर्भाग्य व आपदाओं को न्योता मिलेगा.

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आपको बता दें पहले ही राष्ट्रपति के पास से शबनम (Shabnam) की दया याचिका खारिज हो चुकी है, जिसके बाद ही शबनम-सलीम की शैतानी जोड़ी को फांसी की सजा सुनाई गई है. बेटे ताज ने भी मां की फांसी रुकवाने के लिए प्रेसिडेंट व पीएम से आग्रह किया है, खैर यह 12 साल का मासूम अपनी मां के पाप के बार में क्या ही जानता होगा.

दरअसल, ताज की परवरिश जो परिवार कर रहा है वे भी शबनम के किसी मदद के एहसानमंद हैं, जो खुद भी चाहते हैं कि बेटे के वास्ते शबनम की फांसी को टाला जाए, वे मानते हैं कि जेल के अंदर शबनम अपने गुनाहों का प्रायश्चित कर चुकी हैं, वह हर दिन रोती है और बेटे से गले लगकर उसे कहती है कि उसकी साया तक उसपर न पड़े.

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वहीं फांसी रोकने को लेकर लोगों की मिक्स्ड प्रतिक्रिया सुनने को मिल रही है, कुछ का कहना है जुर्म करने वाला गलत है न कि इसमें जेंडर, धर्म, जाति आदि देखी जानी चाहिए, ऐसे में महिलाओं का हौंसला बढ़ेगा और क्राइम रेट भी.

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