पत्नी ने कैसे बनाया तुलसीदास को ‘गोस्वामी तुलसीदास’

JBT Staff
JBT Staff July 27, 2021
Updated 2021/07/27 at 7:49 PM

Goswami Tulsidas biography in hindi: कहा जाता है जिंदगी को पूरी तरह बदलने के लिए एक वाकया काफी होता है, महान कवि तुलसीदास की जिंदगी से जुड़ा किस्सा भी कुछ ऐसा ही है, पत्नी से अपार प्रेम करने वाले तुलसीदास को उनकी ही पत्नी से ताना सुनने को मिला तो वह श्रीराम की भक्ति में डूब गए.

‘श्रीरामचरितमानस’ जैसा महाकाव्य लिखने वाले तुलसीदास (Tulsi Das) उन कवियों में से हैं जिन्हें हिंदू धर्म में पूजा भी जाता है, तुलसीदास से गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas) बनने की कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही प्रेरणादायक भी.

दरअसल, बचपन में ही मां के गुजर जाने के बाद पिता ने उन्हें अमंगल करार देते हुए घर से निकाल दिया जिसके बाद एक दासी ने उनका लालन पोषण किया, वक्त आया जब वह दासी भी दूर हो गई, अब तो लोग भी उन्हें अमंगल समझने लगे और वह जैसे तैसे जिंदगी गुजारने को मजबूर हुए.

तुलसीदास का जीवन परिचय (Tulsidas Biography in Hindi)

संक्षिप्त में महाकवि तुलसीदास के जीवन परिचय की बात करें तो उनका जन्म श्रावण मास की सप्तमी तिथि को सन 1532 में हुआ था, जन्म स्थल उत्तर प्रदेश का सोरों (Soron), राजापुर है. तुलसीदास का जन्म माता हुलसी (Hulsi) व पिता आत्माराम दुबे (Atmaram Dubey) से हुआ था.

वाराणसी में रहकर उन्होंने रामचरितमानस, दोहावली, कवितावली, हनुमान चालीसा जैसी अद्भुत रचनाएं की. सन 1623 में वह कशी में स्वर्ग सिधार गए. उनकी रचनाएं हिंदी, अवधि व संस्कृत में हैं, महाकाव्य रामचरितमानस को उन्होंने अवधि भाषा में लिखा था.

कैसे तुलसीदास से बने गोस्वामी तुलसीदास

पत्नी प्रेम ने जब हदें पार की तो खुद पत्नी ने ही उन्हें ताना मार डाला, अपने भाई के साथ पत्नी रत्नावली मायके लौटे ही थी कि उन्हें याद सताने लगी और रात हो रही भारी बारिश में नदी पार कर वह ससुराल जा पहुंचे, यह सफर आसान जरा भी नहीं था क्योंकि मूसलाधार बारिश के कारण नदी में पानी का स्तर बढ़ चुका था.

एक लाश जो नदी में तैर रही थी उसके सहारे उन्होंने नदी पार कर डाली, अब तक रात बहुत हो चुकी थी ससुराल पहुंचे तो काफी खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, उन्होंने फैसला किया कि दूसरी मंजिल पर सोई पत्नी के कमरे में सीधा चढ़ा जाए. उन्हें एक मोटी रस्सी दिखी और पकड़ कर चढ़ गए, पत्नी उन्हें देख घबरा गई क्योंकि बाहर बारिश तेज थी.

पत्नी ने गौर से देखा तो जिसे तुलसीदास रस्सी समझ रहे थे वह सांप था, प्रेम में डूबे पति की तरफ गुस्से में कहती हैं जितना प्रेम आप मुझसे और मेरी देह से करते हैं, इतना अगर भगवान श्रीराम की भक्ति में डूबते तो भवसागर पार हो जाता अर्थात आपका जीवन सफल हो जाता, धन्य हो जाता.

पत्नी रत्नावली की बातें उतरी हृदय में और बने ‘महाकवि गोस्वामी तुलसीदास’

प्रकृति को चुनौती देकर जब तुलसीदास अपने ससुराल पत्नी रत्नावली से मिलने पहुंचे तो ताना सुनने को मिला, इसके बाद उन्होंने चित्रकूट में एक कुटिया बनाई और भक्ति काल की सबसे बड़ी कहानी को अंजाम दिया.

श्रीराम की भक्ति में डूबते हुए वह हनुमान जी के भी करीब आए, फिर उन्होंने रामचरितमानस (Ramcharitmanas) के साथ साथ हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) व संकटमोचन ग्रन्थों की भी रचना की.

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