Religion

Navgrah: नवग्रह व ग्रह दशा में शांति के उपाय, सारे ग्रहों के कुप्रभावों से कैसे बचें

सूर्य शांति एवं सूर्य की दशा मे शांति के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए, उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे मे लाल चंदन, लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दें, सूर्योदय से पूर्व उठें तथा रविवार का व्रत करें, नमक का कम उपयोग करें, बुजुर्गों का सम्मान करें, धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भाग लें,माता-पिता के आशीर्वाद ले,केसर पानी मे डालकर स्नान करे.

चंद्रमाँ शांति के लिए भगवान शिव के साथ शक्ति की उपासना करें, शिवलिंग पर नित्य दूध गंगाजल चढ़ाएं, प्रत्येक सोमवार को रुद्राभिषेक करें, सोमवार का व्रत करें तथा सफेद वस्त्र का दान करें, पहाड़ों की यात्रा करें तथा स्वमाता के चरण छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें, साधु संत महात्माओं का आशीर्वाद लेना मंगलकारी रहेगा,गाय के दूध नहाने के पानी मे डाले.

मंगल ग्रह की शांति – मंगल ग्रह की शांति के लिए प्रत्येक मंगलवार के दिन हनुमानजी को चमेली का घी मिश्रित सिंदूर का चोला चढ़ाएं, तथा सुंदरकांड का पाठ करें, बूंदी तथा चूरमे का प्रसाद अर्पण करें, अपने कुटुंब, सहयोगियों से बैर न रखें, सगे भ्राता को सम्मान दें, मंगलवार का व्रत करें, तामसिक पदार्थों का सेवन ना करें, बंदरों को गुड़ चना केले खिलाएं, नहाने के पानी मे गंगाजल डाले.

बुध ग्रह की शांति के लिए मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, हरे मूंग भिगोकर पक्षियों को दाना डालें, बाजरा कबूतरों को डाले, पालक या हरा चारा गायों को खिलाएं, पक्षियों विशेषकर तोतों को पिंजरों से स्वतंत्रता दिलाएं, गणेश जी की उपासना करें, तीर्थ स्नान करें, नौ वर्ष से छोटी कन्याओं का पूजन करें, बुधवार का व्रत रखें, मंत्रानुष्ठान हवन करके बुध की अनुकंपा प्राप्त करें, ब्राह्मणों की सेवा करें.

बृहस्पति ग्रह शांति के उपाय – देव गुरु की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मणों का सम्मान करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें, चने की दाल गुड़, पीले वस्त्र तथा केशर का मंदिर में दान करें, केशर का तिलक मस्तक पर लगाएं एवं धार्मिक पुस्तकों का योग्य व्यक्तियों को दान करें, केले के पेड़ पर नित्य जल चढ़ाएं, किन्नरों की सेवा करें, भगवान ब्रह्मा का केले से पूजन करें तथा कुल पुरोहित का सम्मान करके आशीर्वाद प्राप्त करें, एवं यथाशक्ति स्वर्ण का दान करें, पितवस्त्र का दान करें.

शुक्र ग्रह की शांति के लिए कनकधारा महालक्ष्मी का दैनिक पाठ करें, श्वेत और स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए, गो की सेवा तथा गोशाला में गुड़, हरा चारा, चने की दाल गायों को खिलाएं, विशेष रूप से श्रीविद्या का पूजन कराएं, एकाक्षी ब्राह्मण को कांसे के कटोरे में खीर खिलाकर दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें, विशेष परिस्थिति में रोग हो तो मृत संजीवनी का मंत्र जप कराएं, अपाहिज लोगों की सहायता करें, चावल दूध सफेद वस्त्र का दान करें, महिलाओं का सम्मान करें, तामसिक भोजन ना करें, दही के सेवन से दिन की शुरुवात करें.

शनि ग्रह की शांति के लिए पीपल वृक्ष तथा भैरव का पूजन करें, इमरती, उड़द की दाल, दही बड़े भैरवजी को चढ़ाएं व प्रसाद में बांटें, श्री हनुमान चालीसा तथा सुंदरकांड का नियमित पाठ करें, पीपल के वृक्ष पर तेल का दीपक जलाएं, जरूरतमंद लोगों की सहायता करें, मजदूरों को तली हुई खाद्य वस्तुओं का दान करें, शनिवार का व्रत करें, पिता के संबंधियों से अच्छे मधुर संबंध बनाए रखें, शनिवार को सरसों के तेल का शनि पर अभिषेक करें, तामसिक पदार्थों का सेवन ना करें, काली गाय की सेवा करे, काले तिल, उड़द की दाल, काले जुते दान करें.

राहु की शांति के लिए मां सरस्वती का पूजन करना चाहिए, घर पर बने शुद्ध शाकाहारी भोजन का ही सेवन करें, किसी भी प्रकार का बिजली का सामान इकट्ठा न होने दें, तथा बिजली का सामान मुफ्त में न लें, ससुराल पक्ष से बिज़ली के उपकरण उपहार मे ना लें, मातृपक्ष के संबंधियों की सेवा करें, सप्तधान्य, सीसा, नारियल, कंबल, नीलवस्त्र, करें.

केतु ग्रह की शांति के लिए गणेशजी की पूजा करें, प्रत्येक बुधवार को गणेश जी की दूर्वा चढ़ाएं, बच्चों को केले खिलाएं, किसी भी धर्मस्थल मंदिर मे पर ध्वजा चढ़ाएं,
कुत्तों को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं, कुत्तों की सेवा करें, लोहा, नारियल काले तिल, सप्तधान्य दान करें.

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