Raksha Bandhan 2021 Muhurat: धनिष्ठा नक्षत्र, शोभन योग एवं विष्टि करण के हैं अति उत्तम संयोग

पं पवन भट्ट
Updated 2021/08/22 at 7:44 AM

Rakshabandhan 2021: इस साल रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा 22 अगस्त 2021 को रविवार को धनिष्ठा नक्षत्र शोभन योग एवं विष्टि करण के साथ शुभ संयोग बन रहा है. भाई बहन के पवित्र सम्बन्धो का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार अपरान्ह काल 13 घंटे 48मिनट से 16घंटे 48 मिनट तक समस्त भारत वर्ष में मनाया जायेगा.

यद्धपि उत्तरी भारत में विशेष करके पंजाब आदि प्रांतो में प्रातः काल से ही भाई बहन के पवित्र त्यौहार मानाने कि परम्परा है.

रक्षाबंधन में भद्रा का का समय व लग्न

भद्रा लग्न की बात करें तो इसमें कोई भी मांगलिक शुभाशुभ कार्य करना निषेध माना गया है अतः रक्षाबंधन में भी यह लग्न अशुभ ही माना जाएगा. परन्तु विशेष आवश्यक परिस्थिथीवश पृथ्वी लोक कि भद्रा मुख छोड़ कर भद्रा पुछ में शुभ कृत्य किये जा सकते है.

रक्षाबंधन 2021 भद्रा का समय एवं लग्न (Raksha Bandhan 2021 Time)

कर्क लग्न:  रक्षाबंधन के दिन 22 अगस्त को प्रातः 5बजकर 26मिनट तक भद्रा का वास पृथ्वी पर रहेगा यह समय शुभाशुभ कार्य के लिए निषेद रहेगा. इसके पश्यात पूरे दिन भर रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया नहीं रहेगा.

शायं 5 :13 से 6:51 तक तक राहु काल की वजह से यह समय रक्षा सूत्र बांधने के लिए अशुभ रहेगा.

रक्षाबंधन 2021 शुभ मुहूर्त (Raksha Bandhan 2021 Muhurat)

कन्या लग्न 7:50 प्रातः से 10:10 रहेगा इस समय को रक्षाबंधन के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाएगा. तुला लग्न प्रातः 10:10 से 12:31 दिन तक रहेगा इसलिए यह समय भी रक्षाबंधन 2021 के लिए शुभ मुहुर्त होगा.

शास्त्रानुसार रक्षाबंधन का महत्व

रक्षाबंधन भारतीय सनातन संस्कृत का विशेष पर्व है. यहा प्राचीन वैदिक युग से प्रचलन में है, प्राचीन काल से ही वैदिक पुरोहित, बहन अपने भाई को दाहिने हाथ में सूत्र बांधते है. राजा बलि के यज्ञ में पुरोहितो ने बलि के हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर उनके यज्ञ को अखंड चलाया, फलस्वरूप उन्होने स्वर्ग बिजय कि प्राप्ति की. साथ ही साथ इस दिन गुरुजन अपने शिष्यों को यज्ञोपवीत संस्कार भी करवाते हैं, यज्ञोपवीत के सूत्र भी मर्यादा धर्म एबं अनुशासन को स्थिर और अखंडित रखने के लिए किया जाता है.

रक्षासूत्र में वैज्ञानिक महत्व

रक्षासूत्र के वैज्ञानिक महत्व भी हैं, हमारे शरीर कि सभी नाड़ियों में पिंगला, सुष्मना इड़ा, ये तीन मुख्य नाड़ियां है. हाथ में रक्षासूत्र को तीन बार बांधने से हमारी तीनों नाड़ियों में प्रमुखता से रक्त संचार में नियंत्रण रहता है, और शरीर में होने वाले रक्त विकार और अन्य रोगों से मुक्ति मिलती है, साथ ही साथ मानसिक बल कि प्राप्ति होती है.

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