Muharram 2021 Date: मुहर्रम कब है, क्या है आशुरा हिजरी, कब शुरू होगा नया इस्लामिक वर्ष

JBT Staff
JBT Staff August 18, 2021
Updated 2021/08/18 at 6:01 PM

Muharram 2021 Kab Hai, Date and time: मुस्लिम समाज के दोनों वर्ग शिया व सुन्नी मुहर्रम का पर्व मनाते हैं, इसके पीछे की वजह कोई हर्षोल्लास नहीं, यह शहादत को याद करने वाला पर्व है. शिया और सुन्नी दोनों मुस्लिम समाज के लोगों का इसे सेलिब्रेट करने का तरीका भी थोड़ा अलग है.

कब है इस्लामिक न्यू इयर Islamic New Year 2021

ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक 9 अगस्त से इस्लामिक न्यू इयर (Islamic New Year 2021) शुरू हो गया था, इस्लामिक कैलेंडर या हिजरी कैलेंडर के मुताबिक पहला महीना मुहर्रम (Muharram) का होता है, यह महीना स्टार्ट होने के 10 दिन बाद रोज-ए-आशूरा (Ashura) मनाया जाता है, इसे पैगम्बर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में गमगीन रहकर मनाया जाता है.

इस साल कब मनेगा मुहर्रम (Muharram 2021 Kab Hai)

मुहर्रम का महीना 9 अगस्त से शुरू होगा जबकि दसवीं तारीख या कहें 20 अगस्त को मुहर्रम (Muharram) या कहें आशूरा (Ashura) का पर्व मनाया जाएगा. शिया समुदाय के लोग इस दिन काले कपड़े पहनते हैं, बलिदान के इस दिन को याद करते हुए देश के कई जगहों पर मुस्लिम लोग अपने ही शरीर पर चोट पहुंचा कर खून बहाते हैं, पैगम्बर मोहम्मद के पोते की की शहादत को याद किया जाता है.

क्यों मनाया जाता है मुहर्रम के माह में यह शोक का दिन

किस्सा जुड़ा है ईराक की राजधानी बगदाद के कर्बला से जहां के लोगों ने पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन व कई मासूमों को मौत के घाट उतार दिया था. खलीफा यजीद बिन मुआविया के लोगों द्वारा मासूमों का खून बहाया गया था. तब से जैसे ही मुहर्रम का चांद नजर आने लगता है लोगों के बीच शहादत को याद करते हुए गमगीन माहौल हो जाता है, शिया समुदाय की महिलाएं तो हाथ की चूड़ियां तक तोड़ती हैं.

सुन्नी समुदाय के लोग आशूरा के मौके पर 2 दिन का रोजा जबकि शिया समुदाय के लोग मुहर्रम महीना स्टार्ट होने के साथ 10 दिन तक रोजे रखते हैं. गलियों में रैली निकाली जाती हैं, पिछले साल कोरोना की वजह से इसकी इजाजत नहीं दी गई थी जबकि इस साल भी गाइडलाइन स्ट्रिक्ट हो सकती है क्योंकि कोरोना की तीसरी लहर के कहर से बचने के लिए राज्य सरकारों की योजनाएं बननी शुरू ही चुकी है.

आशुरा (Ashura) किस तरह मनाया जाता है

इस दिन पैगंबर मोहम्मद के शहीद पोते को याद करते हुए एक तरह की शवयात्रा निकाली जाती है इसे ताजिया भी कहा जाता है, काले कपड़े पहनकर मातम मनाया जाता है. औरतें अपनी चूड़ियां तोड़ती हैं जबकि मर्द अपने शरीर को इन्हीं चूड़ियों से चोट पहुंचाते हैं और चाकूओं व अन्य हत्यारों से खुद के शरीर पर जख्म पहुंचाते हैं, हालांकि इस वजह से इस कई जगहों पर आशुरा पर्व का जमकर विरोध भी होता है.

बताया जाता है कि 680 ई. में कर्बला युद्ध के दौरान पैगंबर मोहम्मद (Paigambar Mohammad) के पोते ने यजीद की सेना का डटकर मुकाबला किया था और फिर शहीद हो गए, इसलिए यह दिन इमाम हुसैन व उनके 72 जानिसारों की शहादत को याद कर मनाया जाता है. सीधे भाषा में कहें तो हजरत इमाम हुसैन (Hazrat Imam Hussain) के अनुयायी इस दिन खुद को तकलीफ पहुंचा कर उनकी शहादत को याद करते हैं.

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