Janmashtami Puja Vidhi 2021: श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर इस तरह विधिवत करें पूजा, शुभ मुहूर्त का रखें विशेष ध्यान

JBT Staff
JBT Staff August 4, 2021
Updated 2021/08/04 at 10:43 AM

Janmashtami Puja Vidhi 2021, Shubh Muhurat: भाद्रपद माह में पड़ने वाली अष्टमी को श्री कृष्ण की विधि विधान से पूजा करने से सारी मनोकामना पूरी होगी. इस दिन श्याम के बाल स्वरूप को पूरे देश में पूजा जाता है, श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी यार गोकुलाष्टमी भी कहा जाता है.

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के रोहणी नक्षत्र में श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक यह तारीख इस साल 30 अगस्त को पड़ रही है, हालांकि 29 अगस्त की रात को ही अष्टमी तिथि की शुरुवात हो रही है, पूजा की विधि व पूजा के लिए शुभ मुहूर्त के बारे में यह लेख है.

जन्माष्टमी व्रत (Janmashtami Vrat) त्यौहार बड़े हिंदू त्योहारों में से एक है, इस दिन व्रत रखकर श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है जबकि अगले दिन दही हांडी खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है. इस व्रत के दौरान रसीले फलों का आहार किया जाता है साथ ही पानी भी पी सकते हैं.

जन्माष्टमी पूजा विधि (Janmashtami Puja Vidhi 2021)

अष्टमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान करना है, घर-मंदिर की सफाई के बाद दीप प्रज्वलित करें, मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें. दिन जन्माष्टमी अर्थात श्री कृष्ण के जन्मदिन का है, तो बाल रूप अर्थात की लड्डू गोपाल की विधिवत पूजा की जाती है. इस दिन बाल कान्हा को झूले पर बैठाने का रिवाज है, उनका जलाभिषेक करें और झूला झुलाएं.

श्री कृष्ण के प्रिय चीजों का भोग लगाएं, जिस तरह खुद व्रत के दिन सात्विक भोजन का आहार करना है उसी तरह कान्हा को भी सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगेगा. श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी की रात को हुआ था, इसलिए रात को ही पूजा का मुहूर्त शुभ माना जाता है, हालांकि सुबह भी पूजा की जाती है लेकिन रात को विधि विधान से पूजा होगी, मेवा का भोग लगाने के बाद श्री कृष्ण आरती करें.

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

श्री कृष्ण के बाल रूप की मूर्ति, चौकी, दही-माखन, नन्हे कान्हा के लिए पीले वस्त्र, फूलमाला, मिश्री, मिठाई, पंचामृत, तुलसी, मिट्टी दिया, धूप-अगरबत्ती, अक्षत. निशित काल में श्री कृष्ण का जन्म हुआ अर्थात आधी रात में श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा की जाती है, पूजा से पहले स्नान कर लें, पूरी अष्टमी तिथि के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें.

जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त (Janmashtami Puja Muhurat)

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी 29 अगस्त रात 11 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो रही है लेकिन 30 अगस्त की रात 11 बजकर 59 मिनट से देर रात 12 बजकर 44 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है, 45 मिनट के इस पूजा काल में पूरी तरह श्री कृष्ण का ध्यान करें, आरती करें, अवश्य मनवांछित फल मिलेंगे.

Share this Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.