Independence Day 2021 Essay in Hindi: स्वतंत्रता दिवस 2021 पर निबंध इस तरह करें तैयार

JBT Staff
JBT Staff August 6, 2021
Updated 2021/08/06 at 11:18 AM

Independence Day 2021 Essay in Hindi 300 words, 500 words, 75th Swatantrata Diwas: भारत का इतिहास हमेशा से ही गौरवशाली रहा है लेकिन आज के दौर के लिए 15 अगस्त 1947 की तारीख सबसे अहम व खास है क्योंकि इस दिन हमें अंग्रेजी हुकूमत से छुटकारा मिला, गुलामी की बेड़ियों से निकलकर देश के लोग आज चांद पर तक जमीन खरीद चुके हैं.

15 अगस्त का दिन आज के भारतीयों के लिए सबसे खास है, 15 अगस्त 1947 से पहले के लोगों ने जो समय देखा उनको भी सलाम है, खासकर उन स्वतंत्रता सेनानियों को कोटि कोटि नमन जिन्होंने भारत को फिर से अखंड भारत बनाने के लिए प्राण न्योछावर कर दिए थे.

आजाद भारत की कमान पहले प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा संभाली गई थी, उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराया था और तबसे हर साल 15 अगस्त को यह सिलसिला चलता आ रहा है, स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2021) के रूप में यह दिन राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाने लगा.

इस दिन (Independence Day 2021) राष्ट्रीय अवकाश रहता है लेकिन स्कूलों, दफ्तरों व आदि जगहों पर देशभक्ति व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराए जाते हैं. निबंध व भाषण प्रतियोगिता (Independence Day 2021 Essay in Hindi) इस दिन के कार्यक्रम का अहम हिस्सा हैं. छोटे स्कूली बच्चों से लेकर बड़े भी इसमें भाग लेते हैं.

स्वतंत्रता दिवस निबंध (Independence Day Essay 300 Words 2021)

पढ़ें स्वतंत्रता दिवस 2021 (Independence Day 2021 Essay in Hindi) पर 300 शब्दों का निबंध और तैयार करें अपना भाषण.

प्रस्तावना

भारत के तीन राष्ट्रीय त्योहारों में से एक स्वतंत्रता दिवस (Independence Day), अंग्रेजों के गुलाम देश को आजाद होने की खुशी में मनाया जाता है. देश को आजादी दिलाने वाले सेनानियों को इस दिन नमन किया जाता है और उन्हें वादा किया जाता है कि हम में से प्रत्येक नागरिक उनके सपनों के भारत को बनाने में अपना योगदान देगा.

स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

15 अगस्त 1947 की तारीख हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में दर्ज हुई लेकिन इसके पीछे का मार्ग बड़ा कठिन रहा था. 200 साल हमारा मुल्क अंग्रेजों के गुलाम रहा, इस दौरान देश में कई विद्रोहियों व सेनानियों व आंदोलनकारियों ने जन्म लिया और अंग्रेजों को ब्रिटेन वापस जाने के लिए मजबूर किया था.

किसी समय में भारत को सोने की चिड़िया का जाता था, यह देश भरपूर संपन्न तो था लेकिन मानो यहां की हवा पर तक हुकूमत अंग्रेजों की थी. जमीन, खेती, अनाज, धन आदि पर अंग्रेजों ने हक जमाया था, इस बीच उनके कई क्रूर शासक आए जिन्होंने देश के लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था, वे बंधुआ मजदूरों की तरह लोगों से काम लेते व खेती कराते थे और फिर मनमाना लगान तक वसूल करते थे.

देश के गुलाम लोग जब भी अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन करते थे या गलत का विरोध करते थे तो वे ऐसा सबक सिखाते थे कि लोगों की हिम्मत पूरी तरह टूट जाए, और फिर कोई कभी उनके विरोध में उठ न पाए,जलियांवाला बाग नरसंहार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.

साल 1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैशाखी जैसा पर्व 13 अप्रैल को मनाया जा रहा था, इसमें रोलैट एक्ट के विरोध में सभा भी हो रही थी, लेकिन जनरल डायर नाम के एक अंग्रेज ऑफिसर ने वहां मौजूद लोगों पर अचानक फायरिंग शुरू करवा दी, इसमें 400 भारतीय मारे गए थे.

स्वतंत्रता सेनानियों ने बदला इतिहास

आजादी की लड़ाई बेहिसाब भारतीयों ने लड़ी, किसी का नाम इतिहास में है तो किसी का नहीं. प्रमुख नामों की बात करें तो इनमें रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, मंगल पांडे, सरदार बल्लभ भाई पटेल, राजगुरु, मौलाना अबुल कलाम आजाद सहित कई नाम शामिल हैं.

स्वतंत्रता दिवस निबंध (Independence Day 2021 Essay 500 Words)

पढ़ें स्वतंत्रता दिवस 2021 (Independence Day 2021 Essay in Hindi) पर 500 शब्दों का निबंध और तैयार करें अपना भाषण.

प्रस्तावना

इस साल आजादी का 75वां साल है, पिछले 74 साल से अखंड भारत खुली हवा में सांस ले रहा है, एक समय था जब हर भारतीय व्यक्ति अंग्रेजी हुकूमत के नीचे दम घोंट रहा था. 15 अगस्त 1947 का ऐतिहासिक दिन आया और अंग्रेजों ने भारत के लोगों की वीरता व एकता के आगे घुटने टेक दिए थे.

अंग्रेजों का भारत आगमन

संपन्न भारत में किसी चीज की कमी नहीं थी तभी 17वीं शताब्दी में अंग्रेजों का इस देश में आना जाना बढ़ गया और वे व्यापार करने लगे. मुगल काल में कब अंग्रेजों ने देश में व्यापार के बहाने सैन्य ताकत बढ़ा दी किसी को पता नहीं चला, देश की कमियों को अपनी ताकत बनाने में वे सफल रहे और चतुरता व छल कपट कर उन्होंने एक के बाद एक राजाओं को राजगद्दी से बाहर का रास्ता दिखाया.

वे राजाओं के क्षेत्रों को चालाकी से हड़पने लगे और उनकी प्रजाओं पर अपनी हुकूमत चलाने लगे, ब्रिटेन बेस्ड 1600 ईस्वी में बनी ईस्ट इंडिया कंपनी को उनकी महारानी एलीजाबेथ ने एशिया में उन्हें व्यापार करने की खुली छूट दी थी, और यह कंपनी भारत में 18वीं सदी आने तक अपना वर्चस्व स्थापित कर चुकी थी.

उन्होंने भारत में रोजगार, तरक्की व शिक्षा आदि के नाम पर हुकूमत शुरू कर दी थी, धीरे धीरे लोगों को समझने में आया कि ये अंग्रेज तो सिर्फ अपने फायदे के लिए देश व देशवासियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे अपना कल्चर, अपने रूल्स आदि थोपते गए और भारत गुलामी की दलदल में धंसता चला गया.

28 दिसंबर 1885 में दादा भाई नौरोजी व ए ओ ह्यूम सहित 64 लोगों के सहयोग से राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की स्थापना हुई, यहां से क्रांतिकारी लोगों के नेतृत्व में लोग जुड़ने लगे और शुरू हुई लड़ाई, एक एक बाद एक कई दल बने और अंग्रेजों को वापस भेजने की जद्दोजहद शुरू हो गई. हालांकि इससे पहले भी रानी लक्ष्मीबाई व मंगल पांडे जैसे वीर योद्धाओं ने बड़ी लड़ाई लड़ी थी.

स्वतंत्रता दिवस का स्वर्णिम इतिहास

न सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाओं ने भी मोर्चा संभाला और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक से बढ़कर एक बड़े आंदोलन किए, एनी बेसेंट, अरुणा आसिफ अली, कमला नेहरु, सरोजिनी नायडू जैसे कई महिलाओं ने क्रूर ब्रिटिश राज का दौर देखा और इससे निपटने के लिए जान झोंक दी थी.

एक तरफ जहां महात्मा गांधी, सरदार बल्लभ भाई पेल, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, सुभाष चंद्र बोस, आदि ने कलम व कानून का सहारा लिया तो क्रांतिकारी वीर मंगल पांडे, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुख देव आदि ने अंग्रेजों के भाषा में उन्हें जवाब देने की ठानी. कम ही उम्र के जवानों के अंदर इतना जोश व देशभक्ति देखकर अंग्रेजों का खून खौल जाया करता था.

महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया, उन्होंने भी कई आंदोलन किए. लॉ की पढ़ाई का जितना उपयोग किया जा सकता था उन्होंने किया और आजादी की लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण रोल अदा किया था, उनके ही नेतृत्व में आखिकार देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया.

कैसे मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस (Independence Day Celebration 2021)

आजादी का यह खास दिन देशभक्ति के नाम होता है, स्कूली बच्चों की रैलियां निकलती हैं, हाथों में तिरंगा व साफ धूली यूनिफार्म खासकर सफेद यूनिफार्म में निकलते हैं, शहर में साफ-सफाई देखने को मिलती है और जगह-जगह तिरेंगे लगे होते हैं, बैकग्राउंड में देशभक्ति गानों की गूंज रहती है.

इस दिन विद्यालयों के अलावा सरकारी दफ्तरों, गांवों व नगरनिगम के मंचों पर रंगा-रंग कार्यक्रम होते हैं, बेहतर प्रदर्शन करने वालों को पुरुस्कृत भी किया जाता है. वहीं दिन की शुरुआत दिल्ली के लाल किले से होती हैं जहां प्रधानमंत्री द्वारा झंडा फहराया जाता है.

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