Life Style

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi 2021: जानें गणेश चतुर्थी पूजा विधि, सामग्री, व्रत कथा व पूजा का शुभ मुहूर्त

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi 2021, Samagri, Vrat Katha: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है, गणेश जी का किसी भी शुभ कार्य में सबसे अहम स्थान माना जाता है, यहां तक कि सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश पूजन से शुरुआत की जाती है.

गणेश भगवान (Ganesh Bhagwan) के प्रति श्रद्धा न सिर्फ भारत में बल्कि अन्य देशों में भी देखने को मिलती है, सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया का तो एक बार का किस्सा ही बड़ा मशहूर है जब यह देश आर्थिक तंगी से गुजर रहा था तो 20 हजार के नोट पर गणेश जी की फोटो छपवाई गई थी.

गणेश पूजन से घर में सुख समृद्धि का वास होता है, जिंदगी के सारे कष्ट दूर होते हैं, महाराष्ट्र-गोवा में इस पर्व की धूम का नजारा ही अलग रहता है. आने वाली गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2021) की बात करें तो भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 10 सितंबर (Ganesh Chaturthi on 10 September 2021) को पड़ रही है.

गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesh Chaturthi Puja Vidhi 2021)

गणेश पर्व, गणेश चतुर्थी के दिन से प्रारम्भ हो जाता है, यह पर्व पूरे दस दिन तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesh Chaturthi Pooja Vidhi 2021) की बात करें तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें, पूजा आसन व मंदिर को जितना हो सके साफ कर लें, पूजा सामग्री पहले ही खरीद कर रख लें, सुबह स्नान व साफ सफाई के बाद गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित करें. श्री गणेश के प्रिय मोदक या लड्डू का भोग पूजा के दौरान लगाया जाता है, फिर गणेश जी की आरती की जाती है.

यह भी पढ़ें:  Dussehra 2021 Date, Wishes, Images: कब है दशहरा 2021, दशहरे या विजयदशमी का जानें शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री (Ganesh Chaturthi Pooja Items 2021)

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री में धूप, दिया, कपूर, मोदक (भगवान गणेश की फेवरेट स्वीट डिश), चंदन, रोली, मौली लाल, फूल आदि प्रमुख है. विधिवत श्री गणेश की पूजा आरती करने से संकट दूर होते हैं, गणेश पर्व जब दस दिनों में समापन की ओर होता है तो 11वें ही दिन गणेश जी की प्रतिमा या मूर्ति का विसर्जन किया जाता है.

गणेश चतुर्थी व्रत कथा (Ganesh Chaturti Vrat Katha 2021)

पौराणिक कथाओं की मानें तो एक बार नर्मदा नदी के तट पर मां पार्वती ने भगवान शिव के साथ चौपड़ खेलने की इच्छा जाहिर की, महादेव ने कहा अवश्य खेलंगे लेकिन जीत-हार का साक्षी कौन होगा. मां पार्वती ने इसका भी समाधान निकाला, उन्होंने घास व तिनके इकठ्ठा कर पुतला बनाया और फिर उसमें प्राण प्रतिष्ठा करके बोला बेटा, हम चौपड़ खेल रहे हैं, जीत-हार का साक्षी कोई है नहीं अतः अंत में आपको जीत-हार फैसला करना है.

यह भी पढ़ें:  Dussehra 2021 Date, Wishes, Images: कब है दशहरा 2021, दशहरे या विजयदशमी का जानें शुभ मुहूर्त

इसके बाद खेल प्रारम्भ हुआ, देवयोग से मां पार्वती तीनों बार माहदेव पर विजय पाने में सफल रही लेकिन बालक से हार जीत का फैसला सुनाने को बोला गया तो वह महादेव को विजयी घोषित कर देता है, मां पार्वती अत्यंत क्रोधित हो जाती हैं, वह बालक को तुरंत श्राप दे डालती हैं, श्राप एक पांव से लंगड़ा व कीचड़ में पड़े रहने का था.

बालक ने अपने किए पर माफी मांगी और कहा कि अज्ञानवश उससे यह हुआ जबकि किसी द्वेष या कुटिलता के चलते ऐसा नहीं किया, मां पार्वती को उससे दया आई और श्राप से मुक्ति का उपाय बताया. बताया गया कि इस जगह नाग कन्याएं गणेश पूजन के लिए आयेंगी, उनके उपदेश से तुम गणेश व्रत करके मुझे प्राप्त करोगे, यह कहकर मां पार्वती कैलाश पर्वत पर चली गई.

ठीक एक साल बाद श्रावण माह में ऐसा ही हुआ, नाग कन्याएं गणेश पूजन के लिए आई और बालक को गणेश व्रत की विधि बताई जिसे जानकर बालक ने 12 दिन तक गणेश जी के नाम के व्रत रखे, उसकी सच्ची श्रद्धा को देखकर गणेशजी ने दर्शन दिए और मनवांछित फल मांगने को कहा, बालक कहता है मेरे पांव में इतनी शक्ति दे दो कि मैं कैलाश पर्वत जाकर अपने मां-बाप से मिल लूं.

यह भी पढ़ें:  Dussehra 2021 Date, Wishes, Images: कब है दशहरा 2021, दशहरे या विजयदशमी का जानें शुभ मुहूर्त

गणेश जी ने बालक की इच्छा पूरी की और वो भगवान शिव के चरणों में पहुंच गया, भगवान शिव को आश्चर्य होता है और वो बालक से इस चमत्कार के बारे में पूछते हैं तब वो उन्हें गणेश व्रत के बारे में बताता है. चौपड़ के बाद से मां पार्वती उनसे क्रोधित थी, इसलिए उन्होंने 21 दिन का व्रत रखा और विधिवत ध्यान करने पर मां पार्वती खुद उनके पास चली आई थी.

पार्वती ने शिवजी के पास आकर इस बारे में पूछा आखिर उन्होंने ऐसा क्या किया कि वह खुद चलकर उनके पास लौट आई हैं, तभी गणेश व्रत की जानकारी मिलने के बाद अपने बेटे कार्तिकेय के लिए उन्होंने इस व्रत का पालन किया था और कार्तिकेय भी खुद चलकर उनके पास आए. अगर आपको ganesh chaturthi 2021 katha पसंद हो तो कॉमेंट करें.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top