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INS Vikrant IAC-1: जानें पहले स्वदेशी विमानवाहक का नाम INS विक्रांत कैसे पड़ा, हजारों करोड़ों की लगी लागत

INS Vikrant IAC-1: भारत भी अब उन ताकतवर देशों में शामिल हो चुका है जिसके पास स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत है, बुधवार से इसका ट्रायल शुरू हो चुका है. पीएम मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सहित देश के तमाम राजनेताओं व प्रसिद्ध हस्तियों ने ट्विटर के माध्यम से खुशी जाहिर की है.

उम्मीद की जा रही है यह स्वदेशी विमान जिसका नाम आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) है, जल्द ही नौसेना की ताकत बढ़ाने का काम करेगा. केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी है कि आत्मनिर्भर भारत व मेक इन इंडिया पहल के तहत इसे तैयार किया गया है.

चुनिंदा देशों के पास है ऐसा विमान

पिछले महीने विमानवाहक युद्धपोत विक्रांत (INS Vikrant) के तटीय परिक्षण सफल रहे थे, कल से समुद्री परिक्षण शुरू किया गया है, इसके सफल होने के बाद अगले साल से यह नौसेना की ताकत बढ़ाने का काम करेगा. इस विमानवाहक पोत के साथ ही देश की समुद्री संपति शक्तिशाली हो चुकी है.

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एयरक्राफ्ट कैरियर IAC-1 (Indigenous Aircraft Carrier) को INS विक्रांत के नाम से जाना जाएगा, इसका सी-ट्रायल के बाद खासा चर्चा में है क्योंकि इसका निर्माण भारत में ही हुआ है, यह एक अत्याधुनिक विमानवाहक विमान है जो चुनिन्दा देशों के पास है.

कैसे पड़ा विमानवाहक पोत का नाम आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant Name Fact)

आईएनएस ‘विक्रांत’ ने इंडो-पाकिस्तान वॉर 1971 के दौरान अहम भूमिका निभाई थी, इसी नाम पर पहले स्वदेशी अर्थात मेड इन इंडिया व आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत तैयार 23 हजार करोड़ के विमानवाहक पोत का नाम INS विक्रांत पड़ा है. राफेल के साथ जहां हवाओं में भारत ने अपना वर्चस्व बढ़ाया है तो वहीं विमानवाहक पोत (INS Vikrant) के साथ ही समुंद्र की गहराईयों में भी अस्तित्व साबित कर दिया है.

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आपको बता दें हजारों करोड़ों की लागत में बना यह विमान विकट हालातों में युद्ध सामग्री जैसे मिसाइल क्रूजर, पनडुब्बी, फ्रिगेट, जहाज आदि को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा सकता है. इससे पहले भी भारत के पास विमानवाहक पोत थे जबकि यह पहला स्वदेशी विमानवाहक है.

इस विमानवाहक से जुड़ी खास बातें (INS Vikrant Specifications in Hindi)

इसकी लम्बाई 262 मीटर जबकि चौड़ाई 62 मीटर है, विशालकाय विमानवाहक के सामने तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अन्य चीजें कितनी छोटी नजर आ रही हैं.

52 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से यह अपनी दूरी तय कर सकता है, एक बार में 7500 समुद्री मील की दूरी तय करने की क्षमता है.

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आईएनएस विक्रांत पर लगभग 17000 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं, 30 लड़ाकू विमान व हेलीकॉप्टरों को इसमें तैनात किया जा सकता है.

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