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Navratri 2019: माँ दुर्गा के 9 रूपों से जुड़ी कहानी ! मिलेगा लाभकारी फल

भारत में माँ दुर्गा का नवरात्री पर्व (Navrati 2019) हर वर्ष बहुत हर्ष और भक्तिभाव से मनाया जाता है. नवरात्री (Navratri) पर्व में माँ दुर्गा के सभी 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. नवरात्री के दिनों में देवी माँ को प्रसन्न करने और कोई इच्छा पूर्ति के लिए व्रत लिया जाता है.

पूरे भारत में अलग-अलग स्थानों में माँ दुर्गा के पीठ भी बने है और पुराणों के अनुसार कहा जाता है जब माता सती का मृत शरीर लेकर भगवान शिव पूरे जगत में तांडव करने लगे जिससे पूरे जगत में हाहाकार मचने लगा तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माँ सती के शरीर को छोटे टुकड़ो में विभाजित कर दिया.

जिससे माँ सती के शरीर के अंश बहुत से स्थानों में गिरे और जहां-जहां माँ सती के शरीर के अंश गिरे वहाँ आज माँ दुर्गा के बहुत बड़े पीठ (मंदिर) बने हैं.

माँ दुर्गा (Maa Durga) के सभी 9 रूपों का बहुत महत्त्व है और माँ दुर्गा के सभी 9 रूप भक्तों को लाभकारी फल प्रदान करते हैं.

माँ दुर्गा ने असुरों का नाश करने को लिए गए 9 रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री का कभी भी आवाहन करने से सारी परेशानिया दूर होकर सुख और समृद्धि प्राप्त होती है.

माँ दुर्गा के 9 रूप हैं और प्रत्येक रूप का अपना एक अर्थ भी है. आइए जानें माँ दुर्गा के 9 रूप के बारे में सचित्र वर्णन.

1- शैलपुत्री (Shailputri)

माँ दुर्गा (Maa Durga) का शैलपुत्री नाम मुख्यतः प्रचंड ऊर्जा को दर्शाता है. माँ दुर्गा का जन्म हिमालय के पर्वतो में हुआ और शैल का अर्थ भी पर्वत ही होता है इस कारण से माँ दुर्गा को पुराणों में पर्वत शिखर की चोटियों की पुत्री भी कहा गया है.

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2- ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini)

माँ दुर्गा (Maa Durga) का ब्रह्मचारिणी नाम सम्पूर्णता को दर्शाता है. इसका अर्थ इस प्रकार से निकाला जा सकता है की जो सम्पूर्ण है, जिसका कोई अंत नहीं, जो सर्वोपरी है, कण-कण में समाया हुआ, जिससे कुछ भी ना छुपा हो. माँ दुर्गा के इस रूप का एक और अर्थ ब्रह्मचार्य का पालन करने से भी है.

3- चंद्रघंटा (chandraghanta)

माँ दुर्गा (Maa Durga) के चंद्रघंटा रूप का पूजन नवरात्री के तीसरे दिन किया जाता है।  माँ दुर्गा के इस रूप का अर्थ मुख्यतः मस्तिष्क से है क्यों की यहीं से ही मन है और मन से ही मस्तिष्क.  मन पर काबू कर पाना असंभव है क्यों की मन की भावना कभी बढ़ती तोः कभी घटती रहती है जैसे चन्द्रमा की चमक कभी बढ़ती तो कभी घटती है.

जब कभी मंदिरो में जितनी बार भी घंटा बजाया जाता है तब घंटा में से एक ही प्रकार की ध्वनि निकलती है. यदि कोई अपने मन की सब भावनाओ से दूर कर ईश्वरी भक्ति में खो जाए ये ही चंद्रघंटा है.

पुराणों के अनुसार के मस्तक में घंटे के आकर का आधा चाँद होने से माँ दुर्गा के इस रूप को चंद्रघंटा भी कहा जाता है.

4- कुष्मांडा (kushmanda)

माँ दुर्गा (Maa Durga) के कुष्मांडा रूप का अर्थ बहुत ही जटिल है क्योंकि कु का अर्थ है छोटा  ष् का अर्थ है ऊर्जा और अंडा का अर्थ है गोला. पूरे विस्तार से कुष्मांडा का अर्थ है छोटी से छोटी कोई भी चीज और कोई भी ऊर्जा अपने आकार से ज़्यादा बढ़ और घट सकती है.

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5- स्कंदमता (Skandamata)

नवरात्री (Navratri 2019) के पांचवे दिन माँ स्कंदमता की पूजा की जाती है. माँ दुर्गा के स्कंदमता अवतार को  ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है. दरअसल भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को स्कंदमता के नाम से भी जाना जाता है इसलिए कार्तिकेय की माता होने की वजह से माँ दुर्गा को स्कंदमता के नाम से भी पूजा जाता है.

अपने मन के द्वारा सोचे गए अच्छे कार्य की शुरुआत कर देना ही स्कंदमता का अर्थ है.

6- कात्यायनी (katyayani)

एक समय ऋषि कात्यायन ने माँ दुर्गा की घोर तपस्या की और वरदान के रूप में माँ दुर्गा को प्रसन्न करके दुर्गा माँ को अपनी पुत्री के रूप में पैदा होने का वर मांगा. जिसके फल स्वरूप माँ दुर्गा ने ऋषि कात्यायन के वहाँ पुत्री के रूप में जन्म लिया और इसी कारण माँ दुर्गा को कात्यायनी के नाम से भी जाना जाता है और उनके कात्यायनी रूप की पूजा की जाती है.

माँ कात्यायनी अदृश्य जगत की माँ है और अदृश्य जगत का चालन और सुचालन भी माँ कात्यायनी देवी ही करती है. माँ कात्यायनी देवी ही नकरात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित करती है.

7- कालरात्रि (Kaalratri)

माँ दुर्गा के इस रूप को काली माँ के नाम से भी जाना जाता है. जगत में हो रहे असुरों के द्वारा अत्याचार को समाप्त करके असुरो का अंत करने के लिए  दुर्गा माँ ने अपना अत्यंत भयानक कालरात्रि अवतार लिया और जगत को असुरो के आतंक से मुक्त कराया. जगत को असुरों के अत्याचार से मुक्त कराने के बाद भी माँ कालरात्रि का क्रोध शांत नहीं हुआ. ये सब देखकर भगवान शिव माँ कालरात्रि के मार्ग में उनके चरणों के सामने आ गए.

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माँ कालरात्रि का पैर भगवान् शिव के ऊपर पड़ते ही माँ कालरात्रि का क्रोध शांत हो गया और माँ कालरात्रि के पैर भगवान शिव के ऊप्पर पड़ने से माँ कालरात्रि की जिहवा बाहर निकल आयी

माँ दुर्गा के इस रूप को नवरात्री के 9वें दिन पूजा जाता है और माँ कालरात्रि का ये रूप ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक है.

8- महागौरी (Mahagauri)

माँ दुर्गा के इस रूप की पूजा नवरात्री के 8वें दिन की जाती है. माँ दुर्गा का महागौरी रूप इस जगत की सब चीजों में सबसे सुन्दर है. माँ दुर्गा के इस रूप की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामना पूरी होती है और इच्छित वर प्राप्त होता है.

माँ दुर्गा का महागौरी रूप बहुत ही कोमल और शांत है. महागौरी बहुत जल्द अपने भक्तो से प्रसन्न हो जाती है और उनके दुःख दूर करके सुख और समृद्धि देती है.

9- सिद्धिदात्री (Siddhidatri)

माँ दुर्गा (Duga Navratri 2019) के सिद्धिदात्री रूप की पूजा नवरात्र के 9वें दिन की जाती है. सिद्धिदात्री माँ दुर्गा का 9वाँ अवतार है. माँ दुर्गा के इस रूप का पूजन करने से बिगड़े काम बन जाते है और कोई भी अच्छा कार्य सोचने से पूर्व ही पूरा हो जाता है.

दुर्गा माँ का सिद्धिदात्री रूप भक्तो को सिद्धि से परिपूर्ण कराता है और भक्तों की मनोकामना पूरी करना के लिए हमेशा तत्पर रहता है.

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