गांधी जयंती 2019: बापू के बारे में आपको नहीं पता होंगी ये बातें, दिलचस्प..

JBT Staff
JBT Staff October 2, 2019
Updated 2019/10/02 at 10:00 AM

Gandhi Jayanti 2019: राष्ट्रपति महात्मा गांधी के 150वीं जयंती पर जानिए कुछ अनसुने किस्से, साउथ अफ्रीका में मॉब लिंचिंग से भी बचे थे बापू.

200 वर्षों तक देश पर ब्रिटिश सरकार ने हुकूमत की थी, आज के दिन जिस महान विभूति महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का जन्म हुआ था उन्होंने सबसे बड़ा रोल अदा कर उनकी हुकूमत छीन ली. यह सब बिल्कुल भी आसान नहीं था, आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ अनसुने किस्से.

राष्ट्रपिता का जन्म 2 अक्तूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर (Porbandar) में हुआ था, उन्होंने पूरे विश्व में अपने जीवन व विचारों से एक अनूठी छाप छोड़ी है. तभी गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस की तरह उनका जन्मदिन भी राष्ट्रीय पर्व (National Festival) के रूप में मनाया जाता है.

सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं उन्होंने अपने विचारों व आदर्श जीवन से पूरे विश्व में शांति का पाठ पढ़ाया. तभी 15 जून 2007 को उनका जन्मदिन विश्व अहिंसा दिवस (International Day of Non-Violence) के रूप में घोषित किया गया था.

आपको बता दें सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, विश्व के 120 देशों में गांधी जयंती मनाई जा रही है. आइए जानते ऐसे महान विभूति के बारे में कुछ दिलचस्प किस्से.

1- अल्बर्ट आइंस्टीन ने बापू से प्रभावित होकर कहा था कि लोगों को यकीन नहीं होगा कि कभी ऐसा इंसान भी इस धरती पर आया था.

2- स्कूल के दिनों की बात की जाए तो वह अंग्रेजी में अच्छे जबकि गणित में औसत व भूगोल में कमजोर छात्र थे.

3- वकालत शुरू करते ही पहला केस हार गए थे बापू.

4- देश व दुनिया के इतने बड़े राजनीतिज्ञ बापू कभी प्लेन में नहीं बैठे.

5- बापू ने कई बड़े देशों में भ्रमण किया लेकिन कभी अमेरिका जाना नहीं हो पाया. इसी देश की टाइम मैगजीन ने 1930 में उन्हें Man Of the Year की उपाधि से नवाजा था.

6- बापू नकली दांतों का इस्तेमाल सिर्फ खाते वक्त किया करते थे और बांकी टाइम इन्हें धोती में बांध कर रखा करते थे.

7- श्रवण कुमार की कहानी और हरिश्चन्द्र नाटक से वह बेहद प्रभावित हुए, राम के नाम से उन्हें बेहद प्रेम था यहां तक कि उनकी जुबान से आखिरी शब्द भी राम था.

8- देश में 53 जबकि विदेशों में 48 सड़कें, बापू के नाम से हैं.

9- भागलपुर में 1934 जब भूकंप आया था तो पीड़ितों की मदद के लिए उन्होंने अपने ऑटोग्राफ के पैसे लिए थे और इसकी राशि थी 5-5 रुपए.

10- 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या हुई थी जबकि 31 जनवरी 1948 को दिल्ली में यमुना किनारे हुआ था अंतिम संस्कार, शवयात्रा में लगभग 10 लाख लोग साथ चल रहे थे और 15 लाख से ज्यादा लोग रास्ते में खड़े थे. यह देश की पहली सबसे बड़ी शवयात्रा थी.

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