जानिए क्या है #MeToo मूवमेंट और कब, कैसे हुई इसकी शुरुआत

Umesh
Umesh October 27, 2018
Updated 2018/10/27 at 9:51 AM
she started me too

बॉलीवुड में इन दिनों #MeToo की ही बातें हो रही हैं. कई हस्तियाँ पर इस मूवमेंट के तहक यौन शोषण के आरोप लग चुके है. आइये आपको बताते हैं कि आखिर ये #MeToo है क्या और इसकी शुरुआत कब, कैसे हुई.

मी टू मूवमेंट के बारे में आप लोग इन दिनों काफी ज्यादा सुन रहे होंगे. पिछले कुछ दिनों में कई बॉलीवुड हस्तियों पर इस मूवमेंट के तहत यौन शोषण के आरोप लग चुके हैं. सबसे पहला आरोप तनुश्री दत्ता ने दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर पर लगाया था. इसके बाद तो मानो बॉलीवुड से जुड़ी महिलाओं को अपनी हैरेसमेंट स्टोरीज कहने का प्लेटफार्म मिल गया.

कुछ महिलाएं वीडियो के जरिए अपनी बात को रख रही है, तो कुछ सोशल मीडिया पर सक्रीन शॉट्स के जरिए अपने साथ हुए हैरेसमेंट के बारे में बता रही है. मी टू मूवमेंट के तहत सबसे ज्यादा बॉलीवुड सेलेब्स फंस चुके है. इसी वजह से आज हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिरी ये मूवमेंट है क्या और इसी शुरुआत कब हुई थी.

इस महिला ने सबसे पहले की इस अभियान की शुरुआत

इस अभियान की शुरुआत सबसे पहले टराना बर्क ने की थी. अफ्रीकी मूल की अमेरिकी नागरिक बर्क एक एक्टिविस्ट होने के साथ एक वकील भी है. वह जब 6 साल की थी, तब उन्‍हें यौन शोषण जैसे दर्दनाक अनुभव का सामना करना पड़ा था. टराना बर्क का यौन शोषण उनके पड़ोसी ने किया था.

इस घटना के बाद बर्क ने शुरू किया था मी टू

मी टू के तहत सबसे पहले एक बच्‍ची के यौन शोषण की कहानी सामने आई थी. टराना ने बताया कि वह एक कैंप में लोगों से मिलने के लिए गई थी. इस दौरान उन्‍हें एक बच्‍ची का बर्ताव अजीब लगा. टराना बर्क ने बच्‍ची से इस बारे में बात की, तो पता चला कि उसकी मां का बॉयफ्रेंड उसका यौन शोषण कर रहा था. इस बच्‍ची की कहानी सुनकर टराना बर्क के दिमाग में दो शब्‍द आए Me Too. बस फिर क्या, यहाँ से एक ऐसा मूवमेंट शुरू हुआ, जो आज तक हैरेसमेंट की शिकार हुई महिलाओं की आवाज बना हुआ है.

ऐसे हुई थी #MeToo हैशटैग कि शुरुआत

#MeToo हैशटैग का सबसे पहले प्रयोग टराना बर्क ने 2006 में महिलाओं को न्‍याय दिलाने के लिए किया था. टराना अश्‍वेत महिलाओं के यौन शोषण से बेहद दुखी थीं और उनके लिए कुछ करना चाहती थीं. उस समय मायस्‍पेस सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर टराना बर्क ने पहली बार हैशटैग MeToo का प्रयोग किया था. किसी को नहीं पता था कि ये हैशटैग आगे चलकर महिलाओं को उनका हक दिलाएगा.

हॉलीवुड में इस तरह हुई इस अभियान की शुरुआत

बता दें कि हॉलीवुड में साल 2017 में इस मूवमेंट की शुरुआत हुई थी. अभिनेत्री एलिसा मिलानो ने हैशटैग #MeToo का यूज करते हुए महिलाओं को यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कहा था. एलिसा ने 15 अक्‍टूबर 2017 को इसका यूज किया. एक दिन में इस हैशटैग को 20 हज़ार से ज्यादा महिलाओं ने यूज करते हुए अपनी कहानी बताई.

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड के दिग्गज प्रोड्यूसर हार्वी वाइंस्टीन को लेकर खुलासे किए थे. उसके बाद उन पर लगे सभी आरोप भी सिद्ध हो गए थे. तबसे ये मूवमेंट इंडस्ट्री में काम कर रही हर महिला के लिए काफी मददगार साबित हुआ है.

बॉलीवुड में इन सेलेब्स पर लग चुका है आरोप

बॉलीवुड में तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर पर आरोप लगाकर इस अभियान की शुरुआत की थी. अब तक इस मूवमेंट के लपेटे में विकास बहल, चेतन भगत, रजत कपूर, कैलाश खैर, जुल्फी सुईद, आलोक नाथ, सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य, तमिल राइटर वैरामुथु और मोदी सरकार में मंत्री एमजे अकबर आ चुके हैं. इन सभी पर महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं.

क्या है कानून में सजा का प्रावधान

किसी महिला का लैंगिग उत्पीड़न हुआ है, तो वह आईपीसी की धारा 354(ए) के तहत केस दर्ज करवा सकती है. इस धारा में मुजरिम को पांच साल तक की सजा हो सकती है. वहीं महिला की लज्जाभंग करने पर आईपीसी की धारा 509 के तहत मुजरिम को 3 साल तक की सजा का प्रावधान है.

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