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इस घटना की वजह से कॉमेडियन बनने पर मजबूर हुए थे कादर खान, बेटे से जुड़ा है कनेक्शन

दिग्गज अभिनेता और राइटर कादर खान नहीं रहे. उन्होंने कनाडा में अंतिम सांस ली. उनके फैन्स और चाहनेवालों के लिए नए साल में इससे बुरी खबर नहीं हो सकती.

दिग्गज अभिनेता और राइटर कादर खान का निधन हो गया है. 81 साल के कादर खान पिछले काफी समय से बीमार थे. पिछले कुछ हफ़्तों से उन्हें सांस लेने में बहुत परेशानी हो रही थी. उन्होंने कनाडा के एक अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली.

कादर खान एक शानदार एक्टर के साथ-साथ एक बेहतरीन राइटर भी थे. उन्होंने 250 से भी ज्यादा फिल्मों के डायलॉग लिखे. अपने 40 साल के करियर में कादर खान ने 300 फिल्मों से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया. अमिताभ से लेकर गोविंदा तक, कादर खान ने कई जनरेशन्स के साथ काम किया.

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करियर के शुरूआती सालों में कादर खान ज्यादातर फिल्मों में विलन की भूमिका में नजर आए थे. उनकी दमदार आवाज़ और नेगेटिव रोल्स में उनके अंदाज पर दर्शक फिदा थे. गौर करने वाली बात ये है कि विलन के रूप में शानदार अदाकारी करने वाले कादर खान ने 90 के दशक में केवल कॉमिक रोल किये. हालांकि, इस बड़े बदलाव के पीछे की एक बड़ी वजह है.

विलन से बने कॉमेडियन

अपने करियर के शुरुआती सालों में कादर खान ने ज्यादातर फिल्मों में विलेन का किरदार निभाया था. उनकी गिनती बॉलीवुड के मशहूर विलन्स में होती थी. अपने अंदाज से लोगों को डराने वाले कादर खान के साथ एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद उन्होंने विलन का किरदार निभाना ही बंद कर दिया.

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दरअसल एक दिन उनका बेटा सरफ़राज स्कूल से लड़कर घर लौटा. जब कादर खान ने अपने बेटे से पूछा कि उसने लड़ाई क्यों की तो सरफराज ने जवाब दिया कि स्कूल में सब उसे विलेन का बेटा कहकर चिढ़ाते हैं. इस घटना ने कादर खान को बदल दिया. इसके बाद उन्होंने तय किया कि वो केवल अच्छे और पॉजिटिव रोल करेंगे.

विलन के बाद कादर खान एक शानदार कॉमेडियन भी साबित हुए.  गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई. दोनों ने साथ राजा बाबू, आँखें, हसीना मान जाएगी, साजन चले ससुराल, कुली नंबर 1, हीरो नंबर 1 और दुल्हे राजा जैसी फिल्मों में दर्शकों को हंसा-हंसाकर पागा कर दिया. कादर खान को 1991 में फिल्म ‘बाप नंबरी तो बीटा दस नंबरी’ के लिए बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला.

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